संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। कलायत में भारतरत्न डाॅ. भीमराव आंबेडकर के नाम पर इंडोर स्टेडियम के प्रस्ताव को नपा के अधिकारियों ने रातोंरात बदल दिया। ऐसा आरोप लगाते हुए नगर पालिका पार्षदों ने बताया कि पालिका की कार्यवाही मेंं बाबा साहब के नाम से इंडोर स्टेडियम के प्रस्ताव को सहमति की मुहर लगाते हुए स्वीकृत किया गया था। रातों-रात अधिकारियों ने स्वीकृत प्रको अस्वीकृति में बदल डाला। वहीं अधिकारियों ने नगर पालिका की प्रशासकीय व्यवस्था में जुड़े भारी भरकम बिलों के प्रस्ताव पर बिना चर्चा के स्वीकृति की मुहर लगा दी।
प्रोसिडिंग बुक मेंं इस प्रकार की चौंकाने वाली कार्यवाही के खिलाफ पार्षदों ने प्रदेश सरकार के साथ-साथ शहरी स्थानीय निकाय निदेशक से बिना देरी के प्रोसिडिंग बुक को जब्त करते हुए जिम्मेवार अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की है। पार्षद कुमारी रेणू धानियां, उषा रानी, प्रीत जगदेव, प्रदीप राणा, संजय सिंगला, महीपाल पंवार, निशा राणा ने बताया कि सोमवार को उन्होंने 16 अप्रैल को नपा में आयोजित साधारण बैठक कार्यवाही की सचिव पवन शर्मा से प्रमाणित प्रति प्राप्त की। इसके अध्ययन से प्रोसिडिंग बुक में व्याप्त गड़बड़ी उजागर हुई। हरियाणा के जिला कैथल की कलायत नगर पालिका की पहली बैठक की कार्यवाही ही सवालों के घेरे में आ गई।
पीएम और सीएम की प्रेरणा से लिया गया था इंडोर स्टेडियम के नामकरण फैसला ः पार्षदों ने बताया कि 14 अप्रैल को कलायत नगर पालिका के पार्षदों, भाजपा पदाधिकारी-कार्यकर्ता, आम नागरिक और विभिन्न संगठनों से जुड़े लोग यमुनानगर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई व सीएम नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में डाॅ. भीमराव आंबेडकर के राष्ट्रीय गौरव के रूप में मनाए गए जयंती समारोह में शिरकत की थी। इसके उपरांत 16 अप्रैल को पार्षदों ने नगर पालिका कार्यकारिणी बैठक मेंं इंडोर स्टेडियम का नामकरण डाॅ. आंबेडकर के नाम से करने का प्रस्ताव रखा गया था।
प्रस्ताव के पक्ष व विपक्ष मेंं हुए मतदान का विवरण नहीं दे पाए सचिव
नगर पालिका सचिव पवन शर्मा ने बताया कि सदन मेंं इंडोर स्टेडियम नामकरण का प्रस्ताव प्रधान व पार्षदों की मौजूदगी में डाला गया। यह नियम अनुसार सही नहीं था। इसलिए इसे अस्वीकार किया गया। प्रस्ताव के पक्ष व विपक्ष में किसी प्रकार के मतदान का वे कोई जवाब नहीं दे पाए। उनका कहना था कि प्रधान व पार्षद पार्षदों के प्रस्ताव लिख पाना संभव नहीं। यदि लिखने में विलंब हुआ तो इसमेंं कुछ गलत नहीं है। उन्होंने कार्यवाही पूरी करते हुए इसे जिला पालिका आयुक्त कार्यालय मेंं भेज दिया था।