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क्रिटिकल केयर यूनिट बनाने की प्रक्रिया को लगा झटका

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कैथल। जिले में बड़े हादसों या आपात स्थिति में इलाज के लिए बनाए जाने वाले क्रिटिकल केयर यूनिट के निर्माण की उम्मीदों को एक बार फिर से झटका लगा है। पहले इसे पुराने अस्पताल में बनाया जाना तय हुआ था लेकिन यह शहर के बीच में है इसीलिए विभाग ने अनुमति नहीं दी। अब नए अस्पताल में भी जगह का अड़ंगा लगा है। विभाग की टीम ने रिपोर्ट दी है कि आपात स्थिति में मरीजों को लाने व ले जाने के लिए खुली जगह होनी चाहिए। इसके लिए यहां बनाए गए पोर्टेबल अस्पताल को सरकाना होगा। जब तक यह नहीं होगा, तब तक क्रिटिकल केयर यूनिट का निर्माण असंभव लगता है।
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गौरतलब कि करीब डेढ़ महीने पहले इस प्रोजेक्ट के लिए स्वास्थ्य विभाग की निदेशक की टीम ने दौरा किया था। इसमें उन्होंने क्रिटिकल केयर सेंटर के निर्माण के लिए पुराने अस्पताल व नए अस्पताल का निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्होंने क्रिटिकल केयर सेंटर को पुराना अस्पताल न बनाकर नया अस्पताल में बनाने का सुझाव दिया था। इसके लिए नया अस्पताल में जगह की संभावनाएं देखी थी। यहां पर भी पोर्टेबल अस्पताल स्थापित होने के कारण जगह नहीं मिल पाई है। इस कारण अब इस प्रोजेक्ट पर संकट के बाद छा गए हैं। अब जिला स्तर पर विभाग की तरफ से दोबारा से पत्राचार शुरू किया है।
स्वास्थ्य विभाग के भवन निर्माण के नोडल अधिकारी डॉ. विकास धवन ने बताया कि क्रिटिकल केयर सेंटर के निर्माण के लिए निदेशक की टीम दौरा कर चुकी है। दौरे में पुराना अस्पताल में सेंटर न बनाने की रिपोर्ट बनाई है। अब इसके नए अस्पताल में संभावनाएं तलाश की जा रही हैं, लेकिन यहां पर पहले से ही पोर्टेबल अस्पताल बना है। उल्लेखनीय है कि जिले के करीब 100 किलोमीटर के दायरे में एक भी क्रिटिकल केयर यूनिट स्थापित नहीं है। ऐसे में जिले में यह यूनिट बनने से कैथल ही नहीं, बल्कि जींद और कुरुक्षेत्र के लोगों को भी इसका लाभ मिलता।
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प्रोजेक्ट के लिए यह थी योजना
क्रिटिकल केयर सेंटर के निर्माण को लेकर पुराना अस्पताल में जगह का चयन किया गया था। जर्जर हो चुकी वेयर हाउस व शहरी स्वास्थ्य केंद्र के भवन के स्थान पर ब्लॉक बनाने का निर्णय लिया था।
सेंटर के निर्माण के बाद यह मिलना है लाभ
बता दें कि जिले में हादसे होने के बाद घायलों को तुरंत इलाज नहीं मिल पाता है। उन्हें दूसरे चंडीगढ़, पटियाला या रोहतक में रेफर करना पड़ता है। क्रिटिकल केयर सेंटर बनने के बाद घायल मरीजों को तुरंत इलाज मिलेगा। इस स्थिति में जान बचेगी। किसी भी प्रकार का रिस्क नहीं होगा। इस सेंटर में अलग से डॉक्टरों की भी नियुक्ति की जाएगी। इसमें एनेस्थीसिया, सर्जन और क्रिटिकल केयर सेंटर के विशेषज्ञ डॉक्टर भी नियुक्त किया जाएगा।
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