कैथल। जिला उपभोक्ता फोरम ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को ट्रक मालिक राम कुमार के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाते हुए 7.50 लाख रुपये का बीमा क्लेम देने के आदेश दिए हैं। आयोग ने माना कि बीमा कंपनी ने चालक के ड्राइविंग लाइसेंस को गलत आधार बनाकर दावा अस्वीकार किया, जबकि दुर्घटना के समय चालक का लाइसेंस पूरी तरह वैध था।
आयोग ने कंपनी को 45 दिनों के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया है। कंपनी को पांच हजार रुपये मानसिक प्रताड़ना के लिए और पांच हजार रुपये मुकदमा खर्च के रूप में देने का आदेश दिया। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करने पर पूरी राशि पर सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। शिकायतकर्ता राम कुमार निवासी एडवोकेट कॉलोनी चीका ने आयोग में दायर शिकायत में बताया कि उनका ट्रक बीमा कंपनी से बीमित था। 4 दिसंबर 2020 को ट्रक दुर्घटनाग्रस्त हो गया था जिसके बाद उन्होंने बीमा क्लेम किया। कंपनी ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि ट्रक चालक दयाल सिंह का ड्राइविंग लाइसेंस अमान्य था।
सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने दलील दी कि चालक का लाइसेंस परिवहन विभाग की ओर से ब्लॉक किया जा चुका था, इसलिए दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता। वहीं शिकायतकर्ता ने बताया कि लाइसेंस दुर्घटना के बाद ब्लॉक हुआ था और दुर्घटना के समय पूरी तरह वैध था। आयोग ने रिकार्ड और परिवहन विभाग की रिपोर्ट का परीक्षण करते हुए पाया कि चालक का लाइसेंस 18 जनवरी 2021 को प्रक्रियात्मक चूक के कारण ब्लॉक किया गया था, जबकि दुर्घटना 4 दिसंबर 2020 को हुई थी। ऐसे में दुर्घटना के समय चालक वैध लाइसेंस धारक था और बीमा कंपनी की ओर से क्लेम खारिज करना सेवा में कमी माना गया।