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खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में की गई बढ़ोत्तरी ऊंट के मुंह में जीरा : राजकुमार

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ढांड। ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन ने खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में की गई बढ़ोतरी को ऊंट के मुंह में जीरा करार देते हुए केंद्र सरकार पर किसानों के साथ वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। संगठन के जिलाध्यक्ष कामरेड राजकुमार सारसा और जिला सचिव कामरेड कृष्ण चंद ने कहा कि धान पर 72 रुपये, मक्के पर 10 रुपये और मूंग पर 12 रुपये की बढ़ोतरी किसानों के साथ भद्दा मजाक है।
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उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन के दौरान केंद्र सरकार ने लिखित में आश्वासन दिया था कि फसलों की खरीद सीटू लागत पर 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर की जाएगी जिससे किसानों की आय दोगुनी हो सके। लेकिन अब सरकार अपने वादे से पीछे हट गई है।
नेताओं ने कहा कि खाद, बीज, कीटनाशक दवाइयों, कृषि औजारों और पेट्रोल-डीजल के लगातार बढ़ते दामों से खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। इससे खेती किसानों के लिए घाटे का सौदा बनती जा रही है। वहीं पेट्रोल-डीजल के दामों में हालिया बढ़ोतरी को उन्होंने आम जनता पर महंगाई का एक और प्रहार बताया।
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उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण हर वर्ष किसानों की फसलें बर्बाद हो जाती हैं लेकिन निजी बीमा कंपनियां मुआवजा देने से हाथ खड़े कर देती हैं। सरकार की ओर से दिया जाने वाला मुआवजा भी बहुत कम होता है और उसे मिलने में वर्षों लग जाते हैं। इससे किसान कर्ज के बोझ तले दबता जा रहा है और कई बार आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हो जाता है।
किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकारें देशी-विदेशी कंपनियों के हित में किसानों और मजदूरों पर जनविरोधी कानून थोप रही हैं। उन्होंने कहा कि जब किसान, मजदूर, छात्र और नौजवान अपनी जायज मांगों के लिए आंदोलन करते हैं तो उन पर पुलिस कार्रवाई की जाती है और झूठे मुकदमे दर्ज किए जाते हैं।
संगठन ने सरकार से मांग की कि किसानों को लागत से डेढ़ गुना मूल्य दिया जाए, पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस और अन्य जरूरी वस्तुओं की बढ़ी कीमतें वापस ली जाएं। इसके अलावा किसानों के कर्ज माफ किए जाएं, बिजली की प्रीपेड स्मार्ट मीटर योजना रद्द की जाए और युवाओं के रोजगार और परीक्षाओं से जुड़ी मांगों को जल्द पूरा किया जाए।
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