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नियमित योग और ध्यान से विकसित होती है सकारात्मक सोच : डॉ. शकुंतला

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फोटो पुलिस लाइन में योग करते हुए साधक।
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कैथल। जिला कारागार और पुलिस लाइन कैथल में पांच दिवसीय योग प्रोटोकॉल प्रशिक्षण शिविर का शुक्रवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया। 11 मई से 15 मई तक चले इस शिविर का उद्देश्य कैदियों और पुलिस अधिकारियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना रहा।
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शिविर का आयोजन जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. शकुंतला दहिया के निर्देशानुसार किया गया। जिला कारागार में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता जेल अधीक्षक अशोक कुमार और उप-अधीक्षक शैलाक्षी भारद्वाज ने की। पुलिस लाइन में आयोजित सत्र में पुलिस अधीक्षक मनप्रीत सिंह मौजूद रहे। शिविर के दौरान आयुष योग सहायकों सतीश, सुनील कुमार, संदीप सिंह, संजू आर्या और सीमा कुमारी ने प्रतिभागियों को विभिन्न योगासन और प्राणायाम का अभ्यास कराया। इसमें सूक्ष्म व्यायाम के तहत गर्दन, कंधे, हाथ, घुटने और रीढ़ को स्वस्थ रखने वाले अभ्यास शामिल रहे। इसके अलावा ताड़ासन, वृक्षासन, त्रिकोणासन, भुजंगासन, शलभासन, वज्रासन, पवनमुक्तासन और शवासन का अभ्यास भी करवाया गया।
योग सहायकों ने प्रत्येक आसन के शारीरिक और मानसिक लाभों की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि नियमित योगाभ्यास से तनाव कम होता है और शरीर में ऊर्जा और स्फूर्ति बनी रहती है। इस अवसर पर डॉ. शकुंतला दहिया ने कहा कि योग शरीर, मन और आत्मा को संतुलित करने वाली प्राचीन भारतीय जीवन पद्धति है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ते तनाव और नकारात्मक सोच को योग और ध्यान के माध्यम से सकारात्मक ऊर्जा में बदला जा सकता है। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि नियमित योगाभ्यास से कैदियों में आत्मविश्वास, धैर्य और मानसिक संतुलन का विकास होता है।
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जेल प्रशासन ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम कैदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक सिद्ध होंगे। शिविर के समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों ने नियमित रूप से योग करने का संकल्प लिया।

फोटो पुलिस लाइन में योग करते हुए साधक।

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