कैथल। प्रधानमंत्री के टीबी मुक्त भारत के संकल्प अभियान के संंबंध में स्टेट टीबी विंग की ओर से अब तक जिलों को रोगी तलाशने का वार्षिक लक्ष्य नहीं दिया। जिससे स्वास्थ्य विभाग की टीमें भविष्य की ठोस योजना नहीं बना पा रही हैं। इसका सीधा असर टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की सफलता पर पड़ने की आशंका है। जिले में जनवरी से मार्च तक सर्वे में 475 रोगी मिले हैं।
नियमानुसार, साल की शुरुआत में ही स्टेट टीबी विंग को जिलावार नए रोगी खोजने का लक्ष्य देना होता है। अप्रैल का महीना शुरू होने के बावजूद अभी तक जिलों को यह नहीं बताया गया है कि उन्हें इस वर्ष कितने नए संदिग्धों की जांच करनी है और कितने रोगियों को उपचार के दायरे में लाना है। जब तक लक्ष्य तय नहीं होता, तब तक स्वास्थ्य टीमें माइक्रो-प्लानिंग, शिविरों का आयोजन और घर-घर जाकर स्क्रीनिंग करने की रणनीति नहीं बना पाती हैं।
कम समय में संभावित रोगी छूटने की आशंका : यदि लक्ष्य तय करने में और देरी होती है, तो विभाग के पास काम पूरा करने के लिए साल के अंत में बहुत कम समय बचेगा। ऐसी स्थिति में कम समय में बड़ा टारगेट पूरा करना चुनौतीपूर्ण होगा। इससे न केवल अभियान की गुणवत्ता प्रभावित होगी, बल्कि जल्दबाजी में की गई स्क्रीनिंग से कई संभावित रोगी छूट भी सकते हैं, जो समाज में संक्रमण फैलाने का कारण बनेंगे। भले ही आधिकारिक लक्ष्य अभी प्रतीक्षित है, लेकिन टीबी की बीमारी थमने का नाम नहीं ले रही है। शुरुआती तीन महीनों (जनवरी से मार्च) में ही प्रदेश में लगभग 20 हजार नए टीबी रोगी मिल चुके हैं। यह संख्या दर्शाती है कि संक्रमण की दर अभी भी काफी अधिक है। संवाद