संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका/कैथल। अनाज मंडी चीका में शनिवार को भारतीय किसान यूनियन चढूनी के प्रदेश उपाध्यक्ष चमकौर सिंह बनेड़ा, जिला उपाध्यक्ष केवल सदरेहड़ी, जिला आईटी सेल प्रभारी जरनैल जैली और हरजिंद्र नंबरदार ने धान के सीजन के दौरान तौल का निरीक्षण किया। इस दौरान किसान नेताओं ने कांटों की बारीकी से जांच की और बोरियों का वजन भी कराया।
इस दौरान बनेड़ा ने मंडी में काम करने वाले मजदूरों से कहा कि वे ईमानदारी से तौल का काम करें, ताकि किसानों के साथ किसी भी तरह की ठगी न हो। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि राइस मिलर मंडी बोर्ड के अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर किसानों की धान सीधे अपने मिलों में गिरवा रहे हैं। इससे सरकार को मिलने वाली मार्केट फीस का लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है।
बनेड़ा ने कहा कि मंडी में धान आने से आढ़तियों को व्यापार और मजदूरों को लोडिंग, अनलोडिंग व सफाई का काम मिलता है। सीजन के दौरान यह काम मजदूरों के घर का छह माह का खर्च चलाने में मदद करता है। लेकिन जब धान सीधे मिलों में गिरती है, तो सरकार को नुकसान होता है और आढ़ती व मजदूरों का हक छीन लिया जाता है।
डिजिटल कांटे से तौल की मांग ः किसानों ने डिजिटल कांटों से तौल करने की मांग के लिए मार्केट कमेटी सचिव सतबीर राविश से मुलाकात की। उनका कहना है कि डिजिटल कांटे में गड़बड़ी करना मुश्किल है और इससे पारदर्शिता आएगी। वहीं फर्सी कांटे में हल्की छेड़छाड़ से तौल में गड़बड़ी हो सकती है, जिसे पकड़ना मुश्किल होता है।
मंडी में तौल का काम 14-15 घंटे चलता है। डिजिटल कांटे की बैटरी बार-बार चार्ज करने में दिक्कत आती है, जिससे तौल का काम बाधित हो सकता है। इन्हीं कारणों से फिलहाल फर्सी कांटे का उपयोग किया जाता है। -कर्म चंद गर्ग, प्रधान मंडी एसोसिएशन चीका
राइस मिलों में गिराई जाने वाली धान की मार्केट फीस काटी जाती है। बिना फीस लिए मिलों में धान गिराने के आरोप निराधार हैं। डिजिटल कांटे प्रयोग के निर्देश सभी आढ़तियों को दे दिए गए हैं। -सतबीर राविश, सचिव मार्केट कमेटी चीका