जिले के गांव मूंदड़ी में बनने वाले प्रदेश के पहले महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के लिए कवायद शुरू हो गई है। विवि ने नए भवन निर्माण का जिम्मा हरियाणा पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन बोर्ड को दिया है। इसके बाद बोर्ड की ओर से भवन की नींव और परिसर के अंदर मिट्टी भरवाने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस काम को पूरा करने के लिए दो करोड़ 18 लाख 23 हजार 344 रुपये खर्च किए जाएंगे।
विश्वविद्यालय फिलहाल डॉ. भीमराव आंबेडकर राजकीय कॉलेज के कमरों में चल रहा है। इसमें पढ़ने वाले विद्यार्थी पिछले करीब तीन वर्षों से विवि के भवन निर्माण कार्य शुरू होने का इंतजार कर रहे थे। अब उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही विवि के विद्यार्थियों नया भवन मिल सकेगा। विवि भवन परिसर की चाहरदीवारी का काम पूरा कर लिया गया है। वहीं भवन निर्माण के लिए
हरियाणा पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन की ओर से नौ अगस्त को टेंडर खोला जाएगा। टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा लेने के लिए आठ अगस्त तक आवेदन प्रक्रिया चलेगी। इससे पहले सीएम ने 24 अक्टूबर 2015 में प्रदेश का पहला संस्कृत विश्वविद्यालय गांव मूंदड़ी में बनाने की घोषणा की थी। उसके तीन साल बाद 13 अगस्त 2018 को यहां पर वाइस चांसलर की नियुक्ति हुई थी। उसके बाद सरकारी कॉलेज में अस्थायी तौर पर कार्यालय और कैंपस बनाकर विश्वविद्यालय चल रहा है। 2019 में पहले शैक्षणिक सत्र की शुरुआत की गई थी। गांव मूंदड़ी में साढ़े 20 एकड़ जमीन पर विश्वविद्यालय बनाया जाएगा। गौरतलब है कि पूर्व कुलपति पर विवि के निर्माण न करवाने के आरोप लगे। उनके कार्यकाल के दौरान प्राध्यापकों की भर्ती में भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे।
इन डिग्री डिप्लोमा में करवाई जा रही है पढ़ाई-
फिलहाल विवि में आचार्य एमए, शास्त्री बीए और आठ विषयों में डिप्लोमा करवाया जा रहा है। बीए स्तर पर शास्त्री में विषय साहित्य, व्याकरण, ज्योतिष, दर्शन, धर्मशास्त्र, योग व वेद की पढ़ाई करवाई जा रही है। जबकि एमए स्तर पर आचार्य में विषय साहित्य, व्याकरण ज्योतिष, दर्शन धर्मशास्त्र, योग, वेद व हिंदू अध्ययन की पढ़ाई विद्यार्थी कर रहे हैं। डिप्लोमा में आयुर्वेद, कर्मकांड, योग, ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, संस्कृत भाषा की दक्षता, वैदिक गणित व वेद का डिप्लोमा करवाया जा रहा है। विश्वविद्यालय में इस समय एक हजार के करीब विद्यार्थी विभिन्न डिप्लोमा में पढ़ाई कर रहे हैं।
पीएचडी के लिए 20 सीटें
महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय में इसी साल से पीएचडी शुरू होगी। इसके लिए 20 सीटें निर्धारित की गई हैं। इनमें अलग-अलग आठ विषयों में पीएचडी की पढ़ाई होगी। इसका उद्देश्य शोधार्थियों को विभिन्न पुरातन धर्मशास्त्र, दर्शन एवं संस्कृत सहित भारतीय भाषाओं में और प्राचीन पांडुलिपियों में निहित ज्ञान राशि को शोध के माध्यम से समाज में स्थापित करना है। इसके अलावा हरियाणा के संस्कृत अध्यापकों के लिए दो सीटें अलग से निर्धारित हैं। विश्वविद्यालय के वीसी रमेश चंद्र भारद्वाज ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर की चाहरदीवारी व परिसर में मिट्टी डालने के लिए हरियाणा पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन बोर्ड ने टेंडर लगा दिया है। इस पर लगभग दो करोड़ 18 लाख 23 हजार 344 रुपये की लागत खर्च की जाएगी। भवन का निर्माण कार्य भी जल्द शुरू हो जाएगा। वर्तमान में विवि की कक्षाएं गांव जगदीशपुरा स्थित राजकीय पीजी कॉलेज में लगाई जा रही हैं।