हर साल प्रशासन की ओर से चाइनीज डोर के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाया जाता है। इसके बावजूद शहर की कई दुकानों पर चाइनीज डोर धड़ल्ले से बिक रही है। इसके कारण कई राहगीर और वाहन चालक घायल हो चुके हैं। वहीं प्रशासन की कार्रवाई चाइनीज डोर बेचने वाले दुकानदारों पर सख्ती की बजाय लोगों और वाहन चालकों को जागरूक करने का अभियान चलाने तक सीमित रहती है। सबसे बड़ी चिंता का विषय रेलवे ओवर ब्रिज पर फंसने वाली डोर हैं। जो दोपहिया वाहन चालकों के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं। जिले में अलग-अलग स्थानों पर पिछले दो दिनों में चाइनीज डोर की चपेट में आने से दो व्यक्ति घायल हो गए।
इसमें से पहली घटना शनिवार शाम को रेलवे ओवर ब्रिज पर हुई। आईटीआई के प्रशिक्षक जितेंद्र कुमार बाइक पर अपने पुत्र को लेने के लिए जा रहे थे। इस दौरान रेलवे ओवरब्रिज पर चाइनीज डोर की चपेट में आने से उनकी बाजू पर काफी गहरा घाव हो गया। निजी अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद वह घर पहुंचे। वहीं रविवार सुबह हुए एक अन्य हादसे में गांव तारागढ़ निवासी महेंद्र सिंह की आंख बाल-बाल बच गई। वह बाइक पर रेलवे ओवर ब्रिज से शहर आ रहा था। इस दौरान वह पुल केऊपर दोनों ओर के बिजली के खंभों में फंसी चाइनीज डोर की चपेट में आ गया। चाइनीज डोर उसकी गर्दन से ऊपर चेहरे और नाक को चीरते हुए गहरा घाव कर गई। उसकी आंख तो बच गई। लेकिन नाक व गाल में आठ टांके लगे। तब जाकर उसका घाव बंद हुआ। महेंद्र ने बताया कि यदि बाइक की स्पीड होती तो उसकी आंख को चोट लग सकती थी।
शहर के अन्य मार्गों पर भी जानलेवा डोर के कारण कोई न कोई बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। उन दुकानदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही, जो इस डोर को बेच रहे हैं। न ही खरीदारों पर सख्ती बरती जा रही है। प्रशासन द्वारा हर बार महज घोषणा करके अपने कर्त्तव्य को पूरा मान लिया जाता है लेकिन रविवार को भी जब मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में लाया गया तो पुलिस को चीन निर्मित मांझे की जरूर याद आई। इसके बाद पुलिस टीम ने रेलवे ओवर ब्रिज के ऊपर से गश्त करते हुए कुछ घंटों के लिए जरूर अभियान चलाया। लेकिन जिन अधिकारियों की चाइनीज डोर बिक्री पर रोक की जिम्मेदारी है, उनकी ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
समाज सेवी राजू डोहर ने कहा कि वे हर साल प्रशासन से मांग करते हैं। इस बार भी उन्होंने इस ओर अधिकारियों का ध्यान दिलवाया है। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती दिख रही।
निजी अस्पताल में चिकित्सक डॉ. राजेश शर्मा ने कहा कि अक्सर इस सीजन में अस्पताल में चीन निर्मित डोर से पीड़ित पहुंचते हैं। यह एक तरह से प्लास्टिक होती है, जो फंसने पर गहरा घाव कर देती है। यदि गर्दन में फंस जाए तो जानलेवा भी हो सकती है। इसीलिए इस पर रोक जरूरी है।
एसपी मकसूद अहमद ने कहा कि पुलिस ने रविवार को इस संबंध में अभियान चलाया है। रविवार को पुलिस ने रेलवे ओवर ब्रिज पर पहुंच कर वाहन चालकों को जागरूक किया। साथ ही नियमानुसार चाइनीज डोर के प्रयोग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को कहा गया है।