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Kaithal News: पहले दिन नहाय-खाय से हुई शुरूआत, बाजार भी सजे

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कैथल। शहर के बाबा शीतलपुरी घाट पर मनाए जाने वाले चार दिवसीय छठ महापर्व की शुरूआत मंगलवार को नहाय-खाय से हो गई है। इस महापर्व के तहत सात नवंबर को डूबते और आठ नवंबर की सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ महिलाएं व्रत का समापन करेंगी। पर्व के लिए पूर्वांचल समाज की महिलाओं में काफी उत्साह है।
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नगर परिषद ने बाबा शीतलपुरी घाट की सफाई करा दी गई है। यहां पर भव्य लाइटों से सजावट की जा रही है। पर्व के तहत पूर्वांचल जनविकास सेवा समिति के सदस्यों ने मंगलवार को घाट पर पत्रकार वार्ता कर महोत्सव के कार्यक्रम की जानकारी दी।
समिति के प्रधान जयकिशन राय ने बताया कि इस बार समिति की ओर से नौवां छठ महोत्सव मनाया जा रहा है। राय ने बताया कि छठ महापर्व में व्रत, पूजा और अर्घ्य की प्रक्रिया में पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है। घर में एक माह पहले से ही लहसुन प्याज का त्याग कर दिया जाता है।
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छठ मैया ने किसी को संतान, किसी को धन तो किसी को जीवन का दिया सुख


फोटो नंबर- 03 से 07

राजिंद्र तंवर

कैथल। छठ पर्व पर पूर्वांचल समाज की महिलाओं में काफी उत्साह का माहौल है। नहाय खाय से शुरू हुए पर्व के तहत व्रत रखने वाली महिलाओं से बातचीत की। पहले दिन पुरुष व महिला श्रद्धालुओं ने शाम के समय ने बाबा शीतलपुरी तालाब पर दीये जलाकर पूजा-अर्चना कर छठ पर्व की शुरुआत की जिसमें पूर्वांचल जन विकास मंच के सदस्य भी मौजूद रहे।
लोक आस्था के महापर्व छठ की नहाय-खाय के साथ शुरुआत हो चुकी है यह पर्व संतान की प्राप्ति और उनकी सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है। इस पर्व में भगवान भास्कर और छठी मइया की पूजा का विधान है। नहाय-खाय के दिन व्रती गंगा समेत पवित्र नदियों में स्नान-ध्यान के बाद सूर्य देव की पूजा करते हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार छठ पूजा की शुरुआत महाभारत के समय में हुई। नहाय-खाय कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर किया जाता है। इस दिन व्रत रखने महिलाएं तालाब या अन्य किसी पवित्र नदी में स्नान और ध्यान के बाद सूर्य देव की पूजा करती हैं।
वहीं बुधवार को इसी तरह से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर खरना मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं और छठी मैया की पूजा में लीन रहती हैं।
इस साल खरना छह नवंबर बुधवार के दिन है। डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देना सात नवंबर के दिन छठ पूजा का तीसरा दिन है, जिसमें डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इसके बाद अगली सुबह आठ नवंबर शुक्रवार को उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।
पूर्वांचल समाज की महिलाएं अपनी श्रद्धा से कठिन निर्जला उपवास रखती हैं

फोटो 03

व्रत करने वाली महिला बिनिता देवी ने बताया कि वह पिछले कईं वर्षो से छठी मैया को व्रत रखती आ रही है। ताकी परिवार में सुख शांंति बनी रहे और छठी मैया का हम पर बहुत आशीर्वाद है। छठी मैया हमारी सारी मनोकामना पूरी कर रही है।

फोटो 04

महिला रिंकू देवी ने कहा कि छठी मैया का व्रत रखने काफी सुकून मिलता है। बताया कि व्रत के दौरान छठी मैया से संतान प्राप्ति की मन्नत मांगी थी। मैया ने संतान देकर उसकी झोली भर दी। आगे भी वह इसी प्रकार निरंतर व्रत रखती रहेगी।

फोटो 05

महिला ललिता देवी ने बताया वह भी छठी मैया का व्रत रखती आ रही है, ताकि परिवार के सदस्यों की दीर्घ आयु हो ओर घर में सुख शांति बनी रहे।

फोटो 06

व्रत रखने वाली महिला अनिता देवी ने बताया वह लगभग पांच वर्षों से छठी मैया का व्रत रखती आ रही हैं। अगर कोई श्रद्धालु सच्चे मन में सच्ची व श्रद्धा से उनकी पूजा करता है तो छठी मैया सभी की मनोकामनाएं पूरी करती हैं।

फोटो नंबर-07
महिला रुबी देवी ने कहा कि वह पिछले 10 वर्षों से छठी मैया का व्रत रख रही है और उसने व्रत के दौरान मैया से पुत्र प्राप्ति की मन्नत मांगी थी और छठी मैया ने उसकी झोली भरते हुए तीन लड़कियों के बाद पुत्र देकर उनकी मनोकामना पूरी की है।
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