गुहला-चीका। प्राचीन श्री मां भवानी मंदिर में आदर्श नाटक क्लब की ओर से 72वें वर्ष आयोजित रामलीला का शुभारंभ सोमवार को नारद मोह लीला के मंचन के साथ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना और हनुमान चालीसा के पाठ से की गई। प्रमुख समाजसेवी दर्शन सिंह सीड़ा ने परिवार और साथियों सहित दीप प्रज्वलित कर लीला का शुभारंभ किया। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
लीला में दिखाया गया कि देवर्षि नारद हिमालय की वादियों में कठिन तपस्या करते हैं। कामदेव भी उनकी तपस्या भंग करने में असफल रहते हैं। इससे नारद को अपनी तपस्या पर अहंकार हो जाता है और वे अपनी विजय का बखान भगवान ब्रह्मा और भगवान शिव के सामने करते हैं। नारद का अहंकार दूर करने के लिए भगवान विष्णु माया रचते हैं।
इसके बाद नारद राजा शीलनिधि की पुत्री विश्वमोहिनी के रूप पर मोहित हो जाते हैं और भगवान विष्णु से उनके जैसा रूप मांगते हैं। भगवान विष्णु उन्हें वानर जैसा मुख दे देते हैं। स्वयंवर में विश्वमोहिनी भगवान विष्णु को वरमाला पहनाती हैं। इससे नारद क्रोधित होकर भगवान विष्णु को स्त्री वियोग का श्राप दे देते हैं। माया समाप्त होने पर उन्हें अपनी गलती का अहसास होता है और वे पश्चाताप करते हैं।
दर्शन सिंह सीड़ा ने कहा कि नारद मोह लीला मनुष्य को अहंकार त्यागकर विनम्रता अपनाने का संदेश देती है। सफलता और सामर्थ्य पर घमंड नहीं करना चाहिए, क्योंकि अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। अयोध्या और वृंदावन धाम से आए कलाकारों ने प्रभावशाली मंचन किया।
इस अवसर पर क्लब प्रधान बलबीर सैनी, राजीव शर्मा, कुलदीप माजरा, मोतीराम गर्ग, कृष्ण धीमान, हरपाल शर्मा, हरबंस सीड़ा, गुरदीप ढांडा, शशिभूषण शर्मा, प्रदीप सीड़ा, गुरमेल सिंह, सुखदाय सिंह, जयभगवान शर्मा, हरचेत बोपर, कृष्ण नंबरदार पीडल, प्रवीण गर्ग, गुरमीत सीड़ा, राजा मोहन राय और राजू बावा सहित अन्य मौजूद रहे।
क्लब के सदस्य मुख्यातिथि का स्वागत करते हुए। विज्ञप्ति