संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। अधिकतम पारा 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचने के साथ ही भीषण गर्मी का असर अब लोगों की सेहत पर भी साफ दिखाई देने लगा है। आसमान से बरसती आग और चिलचिलाती धूप के कारण लोग तेजी से बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। सरकारी और निजी अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ी है। ज्यादातर मरीज उल्टी-दस्त, बुखार और पेट दर्द के हैं।
दोपहर के समय गर्मी और लू का प्रकोप सबसे ज्यादा होने से जरूरी काम के लिए बाहर निकलने वाले लोग हीट स्ट्रोक (लू लगने) और डिहाइड्रेशन का शिकार हो रहे हैं। शरीर में पानी की अचानक कमी के कारण लोगों को चक्कर आना, जी मिचलाना और कमजोरी जैसी शिकायतें हो रही हैं।
धूप के सीधे संपर्क और दूषित खान-पान के कारण पेट दर्द तथा फूड प्वाइजनिंग के मामलों में भी तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालात ऐसे हैं कि अस्पतालों में पहुंचने वाला हर दूसरा या तीसरा मरीज पेट में ऐंठन, उल्टी और दस्त की समस्या से पीड़ित मिल रहा है।
फिजिशियन डॉ. दीपक की लोगों को सलाह : भीषण गर्मी को देखते हुए फिजिशियन डॉ. दीपक ने लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में शरीर में पानी की कमी नहीं होने देनी चाहिए।
तरल पदार्थों का अधिक सेवन करें : दिनभर में कम से कम 3 से 4 लीटर पानी पिएं। नींबू पानी, ओआरएस और छाछ का सेवन करते रहें।
बासी भोजन से करें परहेज : गर्मी में भोजन जल्दी खराब हो जाता है, इसलिए हमेशा ताजा खाना ही खाएं। कटे हुए फल और खुले में बिकने वाले जूस से बचें।
दोपहर में बाहर निकलने से बचें : दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच सीधी धूप में निकलने से बचें। यदि बाहर जाना जरूरी हो तो सिर और मुंह को सूती कपड़े से ढककर ही निकलें।ॉ
ओपीडी में लग रही लंबी कतारें
तापमान में बढ़ोतरी के साथ मौसमी बुखार के मामलों में भी इजाफा हुआ है। नागरिक अस्पताल सहित जिले के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में रोजाना 400 से अधिक नए बुखार के मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। ओपीडी के बाहर सुबह से ही मरीजों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या के चलते डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ पर भी काम का दबाव बढ़ गया है। दवा वितरण केंद्रों और पर्ची काउंटरों पर भी भीड़ के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।