संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने के बाद से शहर के ड्रीम प्राेजेक्ट सिटी स्क्वॉयर का काम अधूरा है। इस प्रोजेक्ट में वर्ष 2019 में निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार होने के आरोप लगे थे।
इसी वर्ष 25 मार्च को सीएम फ्लाइंग के डीएसपी की शिकायत पर नप चेयरपर्सन, ठेकेदार और नप के नौ अधिकारियों पर केस दर्ज किया गया था। पुराना बस स्टैंड के स्थान पर इस प्रोजेक्ट को बनाया जा रहा है। कुल 43 कनाल 10 मरले जगह है। इस प्रोजेक्ट पर पहले तो 38 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जानी थी, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 54 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई। इसके बावजूद प्रोजेक्ट का निर्माण नहीं पूरा हो पाया है।
दरअसल, इस मामले में पिछले साल ही नगर परिषद ने एजेंसी को काम न करने पर ब्लैक लिस्ट किया गया था। इसके बाद एजेंसी का ठेकेदार पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चला गया था। इसके बाद कोर्ट ने यथा स्थिति बनाए रखने के नगर परिषद को आदेश जारी किया था। ड्रीम प्रोजेक्ट सिटी स्क्वॉयर का निर्माण कार्य पूरा न होने से शहर के लोगों को इसका बड़ा मलाल है, जो इस चुनाव में बड़ा मुद्दा बना है।
गौरतलब है कि सिटी स्क्वॉयर में शहरवासियों को कई सुविधाएं मिलनी है। इसमें 30 बैंक एक साथ स्थापित किए जाने की बात कही गई है। पांच मंजिला भवन का निर्माण सिटी स्क्वॉयर के तहत किया जाना है। इसके साथ ही यहां पर पार्किंग की सुविधा भी शहर के लोगों दी जानी है। मामले में पुराना बस अड्डा पर ड्रीम प्रोजेक्ट सिटी स्क्वॉयर निर्माण रोकने पर निर्माण करने वाली एजेंसी को कुछ समय पहले ही नगर परिषद ने निष्कासित कर दिया था।
हैरानी से नगर परिषद ने एजेंसी पर साढ़े पांच करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने के बाद कई बार नोटिस भी दिया था। यह नोटिस देने के बावजूद निर्माण को लेकर कोई बात नहीं बनी। आखिरकार एजेंसी के ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट करना पड़ा था। उल्लेखनीय है कि इस परियोजना के तहत वर्ष 2014 में निर्माण कार्य की शुरुआत की गई थी, लेकिन अफसोस की बात है कि इस निर्माण 10 साल भी पूरा नहीं हो पाया है। इस परियोजना के तहत कभी निर्माण कार्य शुरू हो जाता है तो कभी बंद हो जाता है।
इस संदर्भ में वार्ड-28 के पार्षद और कांग्रेस नेता मोहन शर्मा ने कहा कि शहर के इस ड्रीम प्रोजेक्ट सिटी स्क्वॉयर परियोजना पर गत वर्ष 2018 में निर्माण शुरू हुआ था। इसके बाद इस परियोजना में भ्रष्टाचार करने के आरोप भी पूर्व अध्यक्ष और कई अधिकारियों पर लगे। इस मामले में जांच अभी जारी है।
काम की स्थिति स्पष्ट न करने पर संबंधित एजेंसी निष्कासित कर दिया था। तब उसका संचालक कोर्ट में चला गया था। अब आगामी कार्रवाई कोर्ट के आदेशों पर की जाएगी। - सुरभि गर्ग, अध्यक्ष, नगर परिषद।
ड्रीम प्रोजेक्ट होने के बावजूद निर्माण कार्य पूरा न होना सरकार का गैर जिम्मेदाराना रवैया है। इसका निर्माण कार्य पिछले 10 साल से पूरा नहीं हो सका है। - एडवोकेट राकेश सरदाना, पूर्व पार्षद, कैथल।