गुहला-चीका। किसान आंदोलन के चलते कैथल-पटियाला स्टेट हाईवे पर पड़ने वाले टटियाना बॉर्डर को बंद हुए पूरा एक महीना हो गया है। परेशान किसान और आम नागरिकों ने सरकार से अनुरोध किया है कि उन्हें बहुत दिक्कतें हो रही हैं। इसे देखते हुए बॉर्डर खोलने का आदेश दिया जाए।
गौरतलब है कि किसानों के 13 फरवरी को दिल्ली कूच करने के एलान के चलते प्रशासन ने 11 फरवरी को टटियाना बार्डर पर स्थित घग्गर नदी के पुल को पूरी तरह से बंद कर दिया था और यहां पर आईटीबीपी व पुलिस के जवान तैनात कर दिए थे। तब से लेकर अब तक इस पुल पर से वाहनों का अवागमन पूरी तरह से बंद है।
बीते एक महीने में टटियाना बॉर्डर पर किसान तो नहीं आए, लेकिन इस मार्ग से होकर एक दूसरे प्रदेश में आने जाने वाले लोगों को काफी परेशानियां झेलनी पड़ रही है। सामन लेकर पैदल चलना पड़ रहा है।
बंद किए गए हाइवे के अलावा गुहला चीका को पंजाब से जोड़ने वाले चार वैकल्पिक मार्ग है। इनमें से चीका से होकर कम्हेड़ी तक जाने वाले मार्ग व भागल से भूंसला, रत्ताखेड़ा होकर पुनरेहड़ी पंजाब तक जाने वाले मार्ग, चीका से खुशहाल माजरा, दाबा, चाबा से होकर समाना व गुहला से स्यों माजरा, भटियां से होकर पंजाब में जाने वाले मार्गों को भी वाहन चालक प्रयोग में लाते हैं, लेकिन ये सभी मार्ग छोटे है और बहुत जर्जर हालत में हैं।
बाढ़ के कारण पहले से ही खस्ता हालत में चल रही इन सडक़ों पर से भारी भरकम ट्रकों के गुजरने से ये सड़कें कई जगहों से धंस गई हैं। इन तंग व खस्ता सड़कों पर कई बार ट्रक धंस जाते हैं जिससे छोटे वाहन चालकों को भी घंटों तक जाम में फंसा रहना पड़ता है। जरूरी सामान की सप्लाई के लिए वाहनों का आना जाना जरूरी है यह सब जानते हुए भी सरकार ना तो मुख्य मार्ग को खोल रही और ना ही वैकल्पिक मार्गों की मरम्मत करवा रही है।
ट्रक चालक शीशपाल, लखबीर, सुमित ने कहा कि मुख्य मार्ग बंद होने और दूसरे मार्ग खस्ता हालत में होने के कारण उन्हें अपनी मंजिल तक पहुंचने में भारी दिक्कतें उठानी पड़ती हैं। इन लोगों ने बताया कि चीका से खुशहाल माजरा, सरोला रोड पिछले पंद्रह सालों से खस्ता हालत में हैं। लोगों ने सरकार से मांग की है कि यदि वह टटियाना बार्डर को नहीं खोलना चाहती तो कम से कम वैकल्पिक रास्तों की मरम्मत करवा दे ताकि उन्हें आने जाने में आसानी हो सके।