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Kaithal News: अदालत ने 30 हजार रुपये लौटाने का दिया आदेश

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कैथल। मकान की मरम्मत के लिए उधार लिए 30 हजार रुपये वापस नहीं लौटाने पर अदालत ने रोहताश सिंह को एक माह के भीतर पूरी रकम चुकाने के आदेश दिए हैं। सिविल जज (जूनियर डिवीजन) प्रिंस कुमार की अदालत ने जय कुमार गर्ग के पक्ष में फैसला सुनाते हुए प्रतिवादी को मुकदमे का खर्च भी देने के निर्देश दिए हैं। मामले के अनुसार, सेक्टर-19 निवासी 77 वर्षीय जय कुमार गर्ग कपड़ा उद्योग में महाप्रबंधक के पद से सेवानिवृत्त हैं।
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उन्होंने अदालत में दायर मुकदमे में बताया कि वह जरूरतमंद लोगों को बिना ब्याज के रुपये उधार देते हैं। इसी दौरान अर्जुन नगर निवासी रोहताश सिंह ने 15 मार्च 2024 को मकान की मरम्मत करवाने के लिए उनसे 30 हजार रुपये उधार लिए थे। रकम वापस करने के लिए रोहताश सिंह ने 15 अप्रैल 2024 की तारीख का चेक दिया था। रुपये लेने और चेक देने के संबंध में लिखित रसीद भी दी गई थी।

जय कुमार गर्ग के अनुसार, चेक की तारीख से एक दिन पहले रोहताश सिंह ने उनसे संपर्क किया। उसने बैंक खाते में पर्याप्त रुपये नहीं होने की बात कहते हुए चेक बैंक में नहीं लगाने का अनुरोध किया। इसके बाद भी उसने उधार ली गई रकम वापस नहीं की। बार-बार रुपये मांगने पर भी भुगतान नहीं हुआ तो जय कुमार गर्ग ने 28 दिसंबर 2024 को रोहताश सिंह को कानूनी नोटिस भेजा। नोटिस के बावजूद रकम नहीं मिलने पर उन्होंने 28 फरवरी 2025 को अदालत में वसूली का मुकदमा दायर कर दिया। अदालत से समन जारी होने के बावजूद रोहताश सिंह सुनवाई के लिए पेश नहीं हुआ। इसके बाद 28 मार्च 2025 को उसके खिलाफ एकतरफा कार्यवाही शुरू करने के आदेश दिए गए। सुनवाई के दौरान जय कुमार गर्ग ने अपने पक्ष में शपथपत्र और संबंधित दस्तावेज पेश किए। पंजाब नेशनल बैंक की अंबाला रोड शाखा के कर्मचारी विकास ने खाते से संबंधित रिकॉर्ड और मूल चेक अदालत में प्रस्तुत किया। वहीं, क्लर्क ओमप्रकाश ने कानूनी नोटिस पर वादी के हस्ताक्षरों की पुष्टि की।
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चेक और रसीद से साबित हुआ लेनदेन
अदालत ने दस्तावेजों और गवाहों के बयानों के आधार पर पाया कि चेक और लिखित रसीद उधार दी गई रकम की पुष्टि करते हैं। प्रतिवादी की ओर से न तो कोई जवाब दाखिल किया गया और न ही वादी के साक्ष्यों का खंडन किया गया। वादी ने प्रतिदिन 15 रुपये विलंब शुल्क देने के वादे का भी उल्लेख किया था, लेकिन अदालत ने अपने अंतिम आदेश में इस शुल्क को अलग से देने का निर्देश नहीं दिया। फैसले में अदालत ने रोहताश सिंह को एक माह के भीतर 30 हजार रुपये लौटाने और मुकदमे का खर्च चुकाने के आदेश दिए।
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