फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kaithal News: श्री गुरु गोबिंद सिंह स्टेडियम की हालत बदतर

Sun, 12 May 2024 05:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

कैथल। खानपुर गांव में बने जिला स्तरीय श्री गुरु गोबिंद सिंह खेल स्टेडियम के बदतर हालात में है। मैदान में घास-फूस उग गया है और मैदान का भवन जर्जर हो गया है। स्टेडियम को बने लगभग 10 वर्ष पूरे हो गए हैं। जब स्टेडियम बनाया गया था तो जिला खेल कार्यालय भी वहीं पर स्थित था लेकिन पांच वर्ष पहले विभाग ने अपना कार्यालय भी इंडोर खेल स्टेडियम कैथल में ही बना लिया है।

विभाग ने श्री गुरु गोबिंद सिंह खेल स्टेडियम का पांच वर्ष पहले साथ छोड़ दिया था। जिसके बाद स्टेडियम में सही तरीके से देखभाल नहीं हुई और स्टेडियम की जर्जर हालात हो गई।
विज्ञापन


विभाग ने कार्यालय बदलने से अधिकारियों और कोच को तो सुविधा हुई, लेकिन 20 एकड़ में करोड़ों खर्च कर बनाया गया स्टेडियम पहले से भी बदतर हालत में पहुंच गया है। जिला स्तरीय स्टेडियम के गेट के बाहर इतनी घास और गंदगी जमा है, जहां से प्रवेश भी संभव नहीं है।

ये है स्टेडियम की नई पहचान ः खेल मैदान में कई कई फीट लंबी कांग्रेस घास, स्टेज के चारों तरफ गंदगी और घास, बदहाल शौचालय, टूटा खेल का सामान, भवन की उखड़ी परतें, दर्शक दीर्घा में सीढ़ियों पर उगा पीपल का पेड़ ही स्टेडियम की पहचान है। खिलाड़ियों का कहना कि स्टेडियम गलत जगह पर बना है। शहर से बहुत दूर है।

खिलाड़ियों का आना जाना तो दूर कोच और अधिकारी भी वहां आने जाने में हिचकते हैं। स्टेडियम की बदहाली को दूर करने के कितने ही प्रयास हुए, लेकिन सभी असफल रहे। कितनी बार शहर के नजदीक स्टेडियम बनाने की मांग की गई, ताकि खिलाड़ियों को फायदा मिल सके।
करोड़ों रुपये की लागत से बने स्टेडियम में हो सुधार

गुरु गोबिंद सिंह स्टेडियम शहर से दूर है। इसलिए वहां पहुंचने के लिए युवाओं को भी परेशानी थी। लेकिन करोड़ों की लागत से खेल स्टेडियम बनाया गया है। इसलिए इसके भी हालात में सुधार किया जाए। -अरुण, खिलाड़ी।
विज्ञापन


मैदान में जहरीले कीड़े

होने का है अंदेशा

यह खेल स्टेडियम बनने के बाद भी खिलाड़ी इसका कोई लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। पूरे मैदान में घास उगी हुई है। इसमें जहरीले कीड़े होने का अंदेशा बना हुआ है। वह सुबह चार बजे दौड़ लगाने आते हैं। उस समय बहुत अंधेरा होता है। उन्हें फोन की टार्च

जलाकर दौडऩा पड़ता है। उन्होंने स्टेडियम में लाइट की व्यवस्था का प्रबंध करने की मांग की है। अफसरों को हमारी परेशानी को समझना चाहिए। -मनीष, खिलाड़ी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें