कैथल। पिछले सप्ताह पलवल से बीएस-4 तकनीक की 12 बसें कैथल डिपो पहुंचने के बाद यहां बीएस-3 और बीएस-4 मॉडल की बसों की संख्या 60 हो चुकी है। हालात यह हैं कि इन बसों को रूटों पर सुचारु रूप से चलाने के लिए बार-बार मरम्मत करानी पड़ रही है। रास्ते में ही ब्रेकडाउन होने की वजह से यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
विभाग की ओर से इनकी हालत सुधारने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे। यात्रियों की शिकायतों के अनुसार, पुरानों बसों में कमियों से उन्हें दिक्कतें होती हैं। खासतौर पर कई बसों में सीटों की हालत खराब है। औसतन रोजाना 8 से 10 बसें डिपो की कार्यशाला में खड़ी रहती हैं। किसी बस में शीशे टूटे हुए हैं, तो किसी की सीटें फटी पड़ी हैं।
जर्जर हालत को लेकर रोडवेज कर्मियों में रोष व्याप्त है। ये सभी 60 बसें झज्जर, भिवानी, जींद और पलवल से यहां पहुंचाई गई हैं, जबकि इनके स्थान पर कैथल डिपो की 48 बीएस-6 तकनीक की बसें भेजी गई हैं।
उनका कहना है कि बसों में फॉग लाइटें, पीली टेप की बसों में सुविधा नहीं है। सीटें टूटी पड़ी है। कवर खराब
हो चुके हैं। कई बसों को बॉडी तक भी जर्जर है। संवाद
स्थानीय रूटों पर भी ठीक से नहीं चल पा रहीं बसें
लंबे रूटों की तो बात ही छोड़ें, यह बसें स्थानीय रूटों पर भी ठीक से नहीं चल पा रहीं। कई बसें इतनी पुरानी हैं कि रास्ते में ही रुक जाती हैं, जिससे यात्रियों की यात्रा का समय दुगना हो जाता है। फिलहाल इन्हें अंसंध, चीका, पटियाला, पातड़ा, नरवाना और अन्य ग्रामीण रूटों पर भेजा जा रहा है।
बीच रास्ते में रुक जाती तो होते हैं परेशान
एनसीआर जिलों से आई बसें खराब हालत में हैं। कई बसें यात्रा के दौरान बीच रास्ते में बंद हो जाती हैं। ऐसे में चालक-परिचालक और यात्री सभी परेशान हो जाते हैं। जहां आधे घंटे का सफर होता है, वहां एक-डेढ़ घंटा लग जाता है। -कृष्ण कुमार, चालक, कैथल डिपो
2010 से 2015 मॉडल की पुरानी बसें
रोडवेज कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारी परिचालक महाबीर संधू का कहना है कि सरकार की कमेटी के निर्देशों पर ये बसें भेजी गई हैं। अधिकतर बसें 2010 से 2015 मॉडल की हैं, जिनके बीच रास्ते में खराब होने की आशंका हमेशा बनी रहती है। इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। -गिरीराज, चालक, कैथल डिपो
खिड़कियां टूटीं और आग बुझाने वाले यंत्र भी खराब
कैथल डिपो में पहुंची पुरानी बसों की हालत बेहद खराब है। कई बसों की खिड़कियां टूटी पड़ी हैं और जंग लग चुका है। फर्स्ट एड बॉक्स उपलब्ध नहीं है। आग बुझाने वाले यंत्र एक्सपायर हो चुके हैं। गियर बॉक्स खराब हैं। सीटें टूटीं और उनके कवर फटे हुए हैं। टायर घिसे हुए हैं, बसें बीच रास्ते में खड़ी हो जाती हैं। -शमशेर, चालक, कैथल डिपो
कभी ब्रेकडाउन, कभी गियर की खराबी
बसों में ब्रेकडाउन, कभी गियर की समस्या सामने आ रही है। झज्जर और भिवानी के बाद पलवल से पहुंची आठ बसों को तुरंत रूट पर भेज दिया गया। इनमें से तीन बसें रास्ते में ही रुक गईं। इससे यात्रियों को भी परेशानी झेलनी पड़ी। पंजाब में इन बसों के ब्रेकडाउन होने पर यात्रियों को अतिरिक्त किराया देना पड़ रहा है। -संदीप खटकड़, डिपो प्रधान, हरियाणा रोडवेज जागृति मंच, कैथल
ऐसा नहीं है कि एनसीआर जिलों से आई सभी बसें खराब हालत में हैं। जिन बसों में दिक्कत होती है, उन्हें मरम्मत के बाद ही रूट पर भेजा जाता है। कुछेक बसें ज्यादा खराब हैं, इसलिए उनकी मरम्मत में अधिक समय लग रहा है।
-अनिल चोपड़ा, प्रबंधक, कार्यशाला, कैथल डिपो