संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। केंद्र सरकार के स्वच्छ सर्वेक्षण-2026 की टीमें किसी भी समय शहर का निरीक्षण करने पहुंच सकती हैं, लेकिन दूसरी ओर शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतरती दिखाई दे रही है। सड़कों पर जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं और नगर परिषद के सामने कचरा मुक्त शहर तथा वाटर प्लस जैसी महत्वपूर्ण श्रेणियों में आवेदन करना बड़ी चुनौती बन गया है।
पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से जारी सफाई कर्मचारियों की हड़ताल ने नगर परिषद की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मुख्य बाजारों से लेकर रिहायशी कॉलोनियों तक गंदगी का अंबार लगने लगा है। गलियों में जमा कचरा अब सड़ने लगा है, जिससे उठने वाली बदबू से लोगों का जीना दूभर हो गया है।
हालात ऐसे हैं कि यदि जल्द स्थिति नहीं सुधरी, तो स्वच्छ सर्वेक्षण में शहर की रैंकिंग पर गंभीर असर पड़ सकता है। हालांकि नगर परिषद के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण का कार्य लगातार जारी है। अधिकारियों का कहना है कि कर्मचारियों को मनाने और वैकल्पिक व्यवस्था करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर इन दावों का कोई खास असर नजर नहीं आ रहा।
जिला नगर आयुक्त कपिल शर्मा ने बताया कि व्यवस्था को सामान्य बनाने के प्रयास जारी हैं और कर्मचारी संगठन से लगातार बातचीत की जा रही है। सफाई कर्मचारियों ने कार्यालय के मुख्य गेट पर भी मोर्चा संभाल रखा है, जिससे आम लोगों को कार्यालय में प्रवेश करने में परेशानी हो रही है।
जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, प्रॉपर्टी आईडी, एनओसी और अन्य जरूरी सरकारी कार्य प्रभावित हो गए हैं। दूर-दराज से आने वाले लोग घंटों इंतजार करने के बाद मायूस होकर लौट रहे हैं। आमजन में भी इस स्थिति को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है।
600 सफाई कर्मचारी हड़ताल पर, 11 तक बढ़ी परेशानी
नगर परिषद की सबसे बड़ी चिंता करीब 600 सफाई कर्मचारियों का हड़ताल पर जाना है। अपनी मांगों को लेकर कर्मचारी पिछले कई दिनों से काम छोड़कर परिषद कार्यालय के बाहर धरना दे रहे हैं। कर्मचारियों ने हड़ताल को अब 11 मई तक बढ़ा दिया है। कर्मचारी नेता शिवचरण का कहना है कि जब तक उनकी जायज मांगों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक कर्मचारी काम पर वापस नहीं लौटेंगे।
वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण अनिवार्य
नगर परिषद इस बार कचरा मुक्त शहर की स्टार रेटिंग और वाटर प्लस सर्टिफिकेट हासिल करने की तैयारी कर रही है। इन दोनों श्रेणियों में सफलता के लिए शहर का साफ-सुथरा होना और कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण अनिवार्य माना जाता है लेकिन मौजूदा हालात में शहर कई स्थानों पर डंपिंग साइट जैसा नजर आने लगा है। ऐसे में परिषद की महीनों की तैयारियों पर पानी फिरता दिखाई दे रहा है।
अधिकारियों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि स्वच्छ सर्वेक्षण की टीम इसी स्थिति में निरीक्षण के लिए पहुंच गई, तो न केवल शहर की रैंकिंग प्रभावित होगी, बल्कि परिषद को मिलने वाले फंड और ग्रेडिंग पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
अंबाला रोड पर लगे कचरे के ढेर। संवाद- फोटो : Archive
अंबाला रोड पर लगे कचरे के ढेर। संवाद- फोटो : Archive