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Kaithal News: रामलीला में सीता हरण के मंचन को देख अभिभूत हुए दर्शक

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कलायत में शिव रामलीला मंच पर अभिनय करते कलाकार। संवाद - फोटो : सांकेतिक
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कलायत। प्राचीन कपिल मुनि सरोवर तट स्थित महाराजा अग्रसेन पार्क परिसर में शिव रामलीला मंचन का सातवां एपिसोड आकर्षण का केंद्र रहा। इसमें सूर्पनखा की नाक काटने से लेकर माता सीता के हरण तक के प्रसंगों का मंचन किया गया। कलाकारों के संवाद और अभिनय ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
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कार्यक्रम का शुभारंभ भाजपा नेत्री अनीता ढुल और समाजसेवी राजेश अंबरसर ने रामलीला क्लब के निदेशक मा. रमेश सरीन, सहायक निदेशक नरेश गर्ग, प्रधान सोमनाथ राणा और उपप्रधान मोहन राणा की मौजूदगी में रिबन काटकर किया। अनीता ढुल ने कहा कि भगवान श्रीराम भारतीय संस्कृति के आधार हैं। रामलीला का मंचन युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से रूबरू करवाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने रामलीला के बेहतरीन मंचन के लिए अपने निजी कोष से 21 हजार रुपये की राशि दी।
रामलीला में वनवास के दौरान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के जीवन से जुड़े प्रसंगों को दिखाया गया। मंचन में बताया गया कि वनवास का एक वर्ष शेष रहने पर तीनों के मन में अयोध्या और अपने परिजनों की यादें ताजा होती हैं लेकिन रावण के षड्यंत्र से उनकी जिंदगी में नया संघर्ष शुरू हो जाता है।
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सूर्पनखा ने श्रीराम और लक्ष्मण के सामने रखा विवाह का प्रस्ताव
मंचन के दौरान दिखाया गया कि रावण की बहन सूर्पनखा वन में श्रीराम को देखकर उन पर मोहित हो जाती है और उनके सामने विवाह का प्रस्ताव रखती है। वह अपनी सुंदरता का बखान करते हुए श्रीराम से विवाह करने की इच्छा जताती है। इस पर श्रीराम उसे समझाते हैं कि वे विवाहित हैं और एक पत्नीव्रत का पालन करते हैं। वे दूसरी स्त्री को माता या बहन के समान मानते हैं। इसके बाद सूर्पनखा लक्ष्मण के सामने विवाह का प्रस्ताव रखती है लेकिन वे भी उसे स्वीकार नहीं करते। दोनों भाइयों के इन्कार से क्रोधित होकर सूर्पनखा माता सीता को नुकसान पहुंचाने की धमकी देती है। इस पर लक्ष्मण उसकी नाक काट देते हैं। इस प्रसंग का मंचन देखकर दर्शकों ने कलाकारों के अभिनय की सराहना की।

खर-दूषण की सेना का श्रीराम ने किया संहार
सूर्पनखा अपने अपमान का बदला लेने के लिए खर और दूषण के पास पहुंचती है और उन्हें श्रीराम व लक्ष्मण पर हमला करने के लिए उकसाती है। इसके बाद खर-दूषण अपनी सेना के साथ श्रीराम पर आक्रमण करते हैं। रामलीला में दिखाया गया कि श्रीराम युद्ध में खर-दूषण सहित उनकी सेना का संहार कर देते हैं। इसके बावजूद सूर्पनखा शांत नहीं होती और लंका पहुंचकर अपने भाई रावण को पूरी घटना बताती है। वह रावण को माता सीता का हरण करने के लिए उकसाती है।

मारीच को सोने का हिरण बनने के लिए किया तैयार
सीता हरण की योजना बनाने के लिए रावण अपने पुराने परिचित मारीच के पास पहुंचता है। वह मारीच को सोने का हिरण बनकर श्रीराम को कुटिया से दूर ले जाने के लिए कहता है। मारीच श्रीराम की शक्ति से परिचित होने के कारण पहले रावण को ऐसा करने से रोकने का प्रयास करता है। वह उसे याद दिलाता है कि श्रीराम के बाण की शक्ति का अनुभव वह पहले कर चुका है। इसके बावजूद रावण अपनी योजना पर अड़ा रहता है और मारीच को सोने का हिरण बनने के लिए तैयार कर लेता है।
लक्ष्मण रेखा पार करवाकर सीता हरण कर लेता है रावण
मंचन में दिखाया गया कि सोने के हिरण को देखकर माता सीता श्रीराम से उसे पकड़कर लाने का आग्रह करती हैं। श्रीराम हिरण के पीछे चले जाते हैं। कुछ देर बाद मारीच श्रीराम की आवाज में सहायता के लिए पुकारता है। आवाज सुनकर माता सीता चिंतित हो जाती हैं और लक्ष्मण को श्रीराम की मदद के लिए भेजती हैं। लक्ष्मण कुटिया के बाहर सुरक्षा रेखा खींचकर वन में चले जाते हैं।

इसके बाद रावण साधु का वेश धारण कर कुटिया में पहुंचता है और भिक्षा मांगता है। वह माता सीता को लक्ष्मण रेखा पार करने के लिए विवश करता है। जैसे ही सीता रेखा पार करती हैं, रावण अपने असली रूप में आकर उनका हरण कर लेता है। इसके बाद श्रीराम और लक्ष्मण कुटिया में लौटते हैं तो माता सीता को वहां नहीं पाकर व्याकुल हो जाते हैं। दोनों भाई सीता की तलाश में वन-वन भटकने निकल पड़ते हैं। इस प्रसंग के साथ रामलीला के सातवें एपिसोड का समापन हुआ।

कलायत में शिव रामलीला मंच पर अभिनय करते कलाकार। संवाद- फोटो : सांकेतिक

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