संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। शहर की हवा में प्रदूषण बढ़ रहा है। सुबह और शाम हवा ज्यादा खराब रह रही है। अब तो धुंध भी पड़ने लगी है। चिकित्सकों की सलाह है कि सुबह और शाम की सैर से बचें। बदलते मौसम और प्रदूषण के कारण सांस व गले से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में चिकित्सकों की सलाह है कि हवा की खराब सेहत देखकर सुबह-शाम बाहर निकले, यही स्वास्थ्य के लिए बेहतर होगा।
नागरिक अस्पताल में रोजाना करीब 65-70 मरीज सांस संबंधी दिक्कतों के इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जिनमें लगभग 30 मरीज ओपीडी और 20 मरीज इमरजेंसी में आ रहे हैं। इसके साथ ही आंखों के मरीजों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। दरअसल, प्रदूषण के कारण लोगों को शाम के समय अपने कामकाज से घर लौटते समय आंखों में जलन महसूस होने लगी है। आंख से पानी, लाल होना, खुजली होना व शाम के समय आंख में जलन जैसी समस्या के केस ज्यादा हैं। आंखों के औसतन मरीजों की संख्या 40-50 रहती थी, वह 90-100 हो गई है।
शनिवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 249 दर्ज किया गया। यह हवा की गंभीर श्रेणी मानी जाती है। हवा में ऑक्सीजन का स्तर घटा है, जबकि नाइट्रोजन ऑक्साइड, पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे हानिकारक तत्व तेजी से बढ़ गए हैं। इससे लोगों में सांस से जुड़ी बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं। शहर की हवा में नाइट्रोजन ऑक्साइड का स्तर औसतन मानक से कहीं अधिक दर्ज किया गया है। रविवार को पीएम 2.5 का स्तर 174 दर्ज किया गया और पीएम 10 का आकड़ा 241 रहा। सिविल सर्जन डॉ. रेनू चावला का कहना है कि अस्थमा, फेफड़ों और हृदय रोग से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ रही है। लोगों में आंखों में जलन, गले में खराश और सिरदर्द की शिकायतें भी आम हो गई हैं। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति गंभीर है।
ये बरतें सावधानी
धूल, मिट्टी से आंखों का बचाव करें। धूल मिट्टी वाले स्थान पर काम करते समय काले चश्मे का प्रयोग करें। आंखों में एलर्जी की दिक्कत होने पर विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह लेकर इलाज लें। खेतों या अनाज मंडी जा रहे हैं तो चश्मा लगाएं, वापस आने पर आंखों को पानी से धोएं।