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Kaithal News: प्रशासन की फूली रहीं सांसें पर नहीं आए किसान

Wed, 14 Feb 2024 03:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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कमल बहल
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कैथल/गुहला-चीका। किसानों के दिल्ली कूच को देखते हुए मंगलवार को जहां एक तरफ अंबाला में शंभू और जींद में दातावाला सिंह बॉर्डर पर बवाल हुआ। वहीं, कैथल जिले में पंजाब के टटियाना और संगतपुरा बॉर्डर पर भी किसानों के आने का अंदेशा था। जिला प्रशासन की पूरा दिन सांसे फूली रही, लेकिन इन दोनों ही बॉर्डरों पर किसानों के न पहुंचने पर प्रशासनिक अधिकारियों ने राहत की सांस ली।

मंगलवार सुबह से ही प्रशासनिक अमले ने टटियाना व संगतपुरा बॉर्डर पर डेरा डाल लिया था। पंजाब के पटियाला जाने के लिए टटियाना गांव में बॉर्डर का मुख्य रास्ता है। इस स्थिति में जिला प्रशासन ने सात चरण में ही सुरक्षा कर दी थी। यहां पर सुबह से ही करनाल मंडल के पुलिस महानिरीक्षक संतेद्र गुप्ता, एसपी उपासना, डीसी प्रशांत पंवार, एडीसी सी जया श्रद्धा सहित अन्य अधिकारी मौके पर ही मौजूद थे। पुलिस महानिरीक्षक सतेंद्र गुप्ता वहां पर ही मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने स्थिति पर पूरी तरह से नजर बनाए रखी परंतु किसानों के जींद में दाता सिंह वाला और अंबाला में शंभू बॉर्डर पर ही काफी संख्या में एकत्रित होने के चलते वे कैथल जिले में पंजाब से लगते हुए बॉर्डरों पर नहीं पहुंचे।
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हालांकि इस बॉर्डर पर सुबह के समय पंजाब के 15 करीब किसान पैदल ही पहुंचे थे, लेकिन यहां पर प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें वापस भेज दिया। पुलिस ने इन किसानों से आह्वान किया वे धारा 144 के नियमों का पालन करें। इसके बाद ये किसान वापस लौट गए। संवाद

किसानों को किसी भी प्रकार से कानून हाथ में नहीं लेने दिया जाएगा। इसके लिए पूरी तरह से व्यवस्था की गई है। यहां पर सात चरण में सुरक्षा लगाई गई है। आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयारी की गई है। सभी फोर्स भी अपनी-अपनी ड्यूटी कर रही है। -सतेंद्र गुप्ता, पुलिस महानिरीक्षक, करनाल मंडल।
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हमें रोक कर गलत कर रही सरकार : निशान सिंह

पंजाब के एक किसान संगठन के नेता निशान सिंह ने कहा कि हरियाणा सरकार किसानों को रोक कर बहुत गलत कर रही है। अब तो हरियाणा सरकार के आदेशों पर प्रशासन ने रास्ते बंद किए हैं। परंतु जब यह रास्ते खुलेंगे तो किसान भी अपना पक्का मोर्चा लगाने से पीछे नहीं हटेंगे। कहा कि किसान अपनी मांगों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ धरना व प्रदर्शन करना चाहते हैं, लेकिन हरियाणा सरकार उन्हें नहीं करना दे रही है, जो नाइंसाफी है। किसान के सब्र का बांध टूट गया तो वह पीछे नहीं हटेगा।


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