संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। महज 20 दिनों के भीतर प्रकृति ने करवट ली है और ठंड की जगह अब चिलचिलाती धूप ने ले ली है। जनवरी के अंत तक जो तापमान लोगों को ठिठुरने पर मजबूर कर रहा था, वही अब 31 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। दोपहर के समय हालात ऐसे हैं कि लोग घर से बाहर निकलते समय सूती कपड़ों और पंखों का सहारा लेने लगे हैं।
करीब तीन सप्ताह पहले अधिकतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ था, जो सामान्य से कम था। शीतलहर के चलते दिन में भी सिहरन महसूस होती थी, लेकिन फरवरी के अंतिम सप्ताह और मार्च की शुरुआत के साथ ही सूरज के तेवर तीखे हो गए। इस अवधि में तापमान में लगभग 14 डिग्री सेल्सियस की उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
मौसम वैज्ञानिक डा. रमेश चंद्र वर्मा के अनुसार पहाड़ी क्षेत्रों में पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर पड़ने और मैदानी इलाकों में शुष्क हवाओं के सक्रिय होने से गर्मी ने समय से पहले दस्तक दे दी है।
दोपहर की धूप अब चुभने लगी
सुबह और रात के समय अभी भी हल्की ठंड बनी हुई है, लेकिन दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच गर्मी अपना असर दिखाने लगी है। सड़कों पर निकलने वाले राहगीरों को पसीना आने लगा है। बाजारों में ठंडे पेय पदार्थों, आइसक्रीम और गन्ने के रस की मांग अचानक बढ़ गई है।
बढ़ती गर्मी ने लोगों की दिनचर्या भी बदल दी है। दो सप्ताह पहले तक जो जैकेट और स्वेटर जरूरी थे, अब वे अलमारी में रखे जा रहे हैं। दोपहर की धूप अब सुहानी नहीं, बल्कि चुभन पैदा करने वाली महसूस हो रही है।
स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा : तापमान में आए इस अचानक बदलाव को लेकर चिकित्सक भी सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। दिन और रात के तापमान में 10 से 15 डिग्री तक के अंतर के कारण वायरल बुखार, सर्दी-खांसी और बदन दर्द के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। शरीर इस तीव्र परिवर्तन को सहन नहीं कर पाता, जिससे प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर पड़ सकता है। नागरिक अस्पताल कैथल के डॉक्टर अमरिंद्र ने सलाह दी है कि लोग अभी पूरी तरह से ठंडे पानी और एयर कंडीशनर का उपयोग शुरू न करें। मौसम के अनुरूप धीरे-धीरे बदलाव अपनाएं, पर्याप्त पानी पिएं और दोपहर की तेज धूप से बचने का प्रयास करें।