संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। पट्टी चौधरी, टीक, सेगा, काकोत, सोंगरी, कलायत, कोलेखां, डुडंवा, पिलनी व रावणहेड़ा गांव में गेहूं फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत किसान जागरूकता अभियान व जागरूकता रैलियां आयोजित की गई। इस दौरान किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के फायदे बताए गए।
उप कृषि निदेशक डॉ. बाबू लाल ने बताया कि इस अवसर पर कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की टीम ने किसानों से अपील करते हुए कहा की गेहूं की कटाई उपरांत बचे हुए अवशेषों व भूसा/तुड़ा बनाने के बाद बिल्कुल भी आग न लगाएं। गेहूं की कटाई उपरांत बचे हुए अवशेषों को खेतों में इन-सीटू तकनीक से जमीन की उर्वरता शक्ति बढ़ाएं।
उपमंडल कृषि अधिकारी कैथल डॉ. सतीश कुमार नारा ने किसानों को बताया कि जिला उपायुक्त द्वारा जारी किए गए आदेशों के तहत भारतीय नागरिक सुरक्षा सहिंता, 2023 की धारा 163 के तहत समस्त जिले में गेहूं की फसल की कटाई के बाद बचे हुए अवशेषों को जलाने को लेकर प्रतिबंध लगाया गया है।
यदि कोई किसान फसल अवशेषों का भूसा/तुड़ा बनाने उपरांत जलाते हुए पाया गया तो भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 व संपठित वायु एवं प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम 1981 के तहत दो एकड़ तक पांच हजार रुपये, दो से पांच एकड़ तक 10 हजार रुपये तथा पांच एकड़ से अधिक पर 30 हजार रुपये तक का जुर्माना व एफआईआर के साथ मेरी फसल मेरी ब्योरा में मुरबा/किला न. की रेड इंट्री दर्ज की जाएगी। इसके अलावा किसान अगले दो सीजन तक अपनी फसल को एमएसपी पर नहीं बेच सकेगा।
इन आदेशों की अवहेलना करते हुए यदि कोई किसान दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।