कलायत तहसील कार्यालय में कुछ दिनों से राजस्व से संबंधित कार्यों के लिए लोगों को अधिकारियों के न मिलने पर दर-दर भटकना पड़ रहा है। क्षेत्र के आस-पास व दूर-दराज के गांवों से आए लोग अधिकारियों का दिन भर इंतजार करने के बाद मायूस होकर लौटने पर मजबूर है। जब भी अधिकारियों के आने बारे कर्मचारियों से पूछा जाता है तो उनके पास कोई जवाब नहीं होता। बात्ता गांव से अंग्रेज, वीरेंद्र, रतन सिंह, कली राम, जोरा सिंह कुराड़, संतोष देवी खरक पांडवा, बालू से कृष्ण, सुनीता, सुनील चौशाला, शमशेर, बजींद्र कलायत, पवन वर्मा, रोशन, नीटू, दर्शना, काला, प्रीतम, विक्रम, राजेश और दूसरे लोगों ने कहा कि पिछले कई दिनों से राजस्व से संबंधित व अन्य कार्यों के लिए पटवारखाने व तहसील के चक्कर लगा रहे है। न तो तहसील कार्यालय में तहसीलदार मिलता है और न ही पटवारखाने में पटवारी। उन्होंने कहा कि तहसील कार्यालय में तहसीलदार और नायब तहसीलदार की स्थायी नियुक्ति न होने से दिन भर रजिस्टरी कार्य के लिए भारी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। तहसीलदार हिम्मत सिंह के छुट्टी पर चले जाने के बाद पुंडरी की तहसीलदार चेतना चौधरी और नायब तहसीलदार बौद्धराज को कलायत का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया था। दो दिनों से दोनों अधिकारियों के न आने से तहसील से संबंधित जमीन की रजिस्टरी व अन्य कार्य न होने के कारण लोगों को मायूस लौटना पड़ रहा है।
पटवारी निर्मल सिंह ने बताया कि 5 अगस्त से 5 सितंबर तक फसल की गिरदावरी करने के लिए उनकी ड्यूटी लगाई गई है। इसके अलावा भी वे समय निकाल कर राजस्व से संबंधित कार्य कर रहे है। लोगों को पटवार से संबंधित कार्यों में किसी प्रकार की समस्या नहीं आने दी जाएगी।