बाइक्स का हैंडल नाबालिगों के हाथ में हैं
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शहर में भारी संख्या में बाइक्स का हैंडल नाबालिगों के हाथ में हैं। हालांकि नाबालिग द्वारा अंजाम दिए गए किसी सड़क हादसे में अब अभिभावक भी जिम्मेदार होंगे। लेकिन इस सब से अनभिज्ञ या फिर जान बूझकर अभिभावक भी नाबालिग बच्चों को स्कूटी, मोटरसाइकिल व अन्य वाहन थमा रहे हैं। अकेले स्कूलों में ही शहर भर से 500 से ज्यादा बच्चे स्कूटी या बाइक पर जाते हैं। जिनमें से अधिकतर के पास ड्राइविंग लाइसेंस या अन्य कागजात नहीं हैं।
ट्रिपलिंग के साथ लेते हैं सेल्फी
स्कूलों व कॉलेजों की छात्र-छात्राएं चलती स्कूटी से सेल्फी लेते हैं। जिसमें हादसा होने की संभावना अधिक है। शहर की सड़कों पर स्कूलों व कॉलेजों के विद्यार्थियों को सेल्फी लेते आम देखा जा सकता हैै। जिसकी ओर ट्रैफिक पुलिस व अभिभावक गंभीर नहीं है। करनाल रोड पर दो दिन पहले भी सेल्फी लेते समय हादसा हुआ। जिसमें दो स्कूली बच्चे घायल हो गए।
शहर के कई ऑटो भी है नाबालिग के हाथों में
ऐसा नहीं है कि केवल बाइक व स्कूटी ही बच्चे चला रहे हैं। शहर में कई नाबालिग लड़के ऑटो भी सड़कों पर धड़ल्ले से चला रहे हैं। ऑटो के अलावा कार भी चलाते हैं। नाबालिगों के हाथ में वाहन होने से अपने व दूसरों की जिंदगी के साथ भी बड़ा हादसा हो सकता है।
वहीं आईटीआई के प्रिंसिपल भूपेंद्र सिंह का कहना है कि नाबालिगों द्वारा वाहन चलाया जाना गलत है। उन्होंने स्वयं पुलिस को बुलाकर आईटीआई में वाहन लेकर आ रहे विद्यार्थियों के कागजात की जांच करवाई थी। ताकि कम उम्र में या फिर नियमों का उल्लंघन करते हुए कोई बच्चा वाहन ना चलाए। इसमें बच्चों की ही सुरक्षा होती है।
ट्रैफिक एसएचओ दीपक कुमार ने बताया कि नाबालिग बच्चों के हाथ में वाहन देने में अभिभावक भी जिम्मेवार है। सुबह व दोपहर को नाबालिग बच्चों को रोककर उनके चालान किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि ऑटो व कार बिना लाइसेंस सड़कों पर दौड़ाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।