कैथल। हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के राज्य प्रधान प्रभु सिंह ने बताया कि संगठन ने अतिरिक्त मुख्य सचिव, शिक्षा विभाग हरियाणा को पत्र लिखकर 28 नवंबर को जारी शिक्षक तबादला नीति के प्रारूप में मौजूद खामियों की ओर ध्यान दिलाया है। उनका कहना है कि यदि इन खामियों का समाधान किया जाए तो विभाग को भी लाभ मिलेगा और विद्यार्थियों तक शिक्षा की पहुंच तथा उसकी गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
उन्होंने कहा कि संगठन का हमेशा स्पष्ट मत रहा है कि तबादला नीति अध्यापक के प्रार्थना-पत्र और छात्रों की आवश्यकता के आधार पर तैयार होनी चाहिए। खाली पदों की कमी की सज़ा शिक्षकों को न दी जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि तबादला प्रक्रिया को विकेंद्रीकृत करते हुए पहले खंड, फिर जिला और अंत में राज्य स्तर पर तबादले किए जाएं। प्रभु सिंह ने कहा कि रैशनलाइजेशन की प्रक्रिया शिक्षा संबंधी स्वीकृत मानकों पर आधारित होनी चाहिए, न कि सरकार के व्यय कटौती मानकों पर।
उन्होंने याद दिलाया कि हर साल शैक्षिक सत्र की शुरुआत में तबादले करने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग ने 2016 में ऑनलाइन तबादला नीति लागू की थी, लेकिन अब उसमें प्रतिगामी बदलाव करते हुए नई तबादला नीति का ड्राफ्ट जारी किया गया है। संवाद