कैथल। पंचायत भवन में सर्व शिक्षा विभाग के तहत अशक्त बच्चों विकास के लिए लगाए गए अध्यापकों के सात दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में भाग लेने के लिए आए अध्यापक सोते एवं गप्पें हांकते नजर आए।
अशक्त बच्चों के लिए आयोजित शिविर में दिए जा रहे प्रशिक्षण में अध्यापकों की रुचि कम ही देखने को मिली। अपने ही क्रियाकलापों में व्यस्त अध्यापकों के बीच मुख्य प्रशिक्षक भी अपना लेक्चर देकर महज औपचारिकता निभाते नजर आए। इस प्रशिक्षण शिविर में छह खंडों के 133 टीचर ने भाग लिया।
निशक्त बच्चों के लिए काफी महत्वपूर्ण है शिविर
प्रशिक्षण शिविर अशक्त बच्चों के लिए काफी महत्वपूर्ण है। इस शिविर में अगले सात दिनों में बच्चों को लेकर कई अहम जानकारी दी जानी हैं। इसमें मानसिक तौर पर अशक्त बच्चों के बारे में जानकारी होने, दृष्टि दोष वाले बच्चों को पढ़ना लिखना सिखाना, पूरी तरह अशक्त बच्चों या ज्यादा विकसित बच्चों को सिखाना, शारीरिक विकलांग, सुनने में अशक्त बच्चों को पढ़ना लिखना सिखाना, आंखें, हाथ व पैरों की गड़बड़ी वाले बच्चों को स्कूल में दाखिल कर शिक्षा देना शामिल है।
नजदीकी स्कूलों में दाखिला दिलाने की कवायद
प्रशिक्षण का एक अन्य उद्देश्य यह भी है कि अध्यापकों को पूरी तरह से जानकारी होने के बाद बच्चों को विशेष आवश्यकता वाले स्कूल में दाखिला लेने की जरूरत नहीं रहेगी। वह अपने पास के ही स्कूल में दाखिला ले सकेगा। जहां उक्त प्रशिक्षण प्राप्त अध्यापक की नियुक्ति होगी। सर्वशिक्षा अभियान के जिला संयोजक सुरेन्द्र मोर ने बताया कि अशक्त बच्चों को पढ़ाने के लिए सरकारी स्कूलों के अध्यापकों का चयन किया गया है। सरकारी स्कूलों के दो-दो अध्यापकों को विशेष प्रशिक्षण के लिए बुलाया गया है। जिले के अभिभावक अशक्त बच्चों को पढ़ने के लिए दूर भेजना नहीं चाहते। जिस कारण अशक्त बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते रहे हैं। ऐसे बच्चों को इस प्रशिक्षण का काफी लाभ मिलेगा।
अव्यवस्था के बारे में अधिकारी अनजान
इस संबंध में डीपीसी सुरेंद्र मोर का कहना है कि प्रशिक्षण शिविर में अव्यवस्था के बारे में उनके संज्ञान में नहीं है। वह किसी जरूरी मीटिंग से पंचकूला गए हैं। अगर प्रशिक्षण शिविर में ऐसा माहौल था तो उसके बारे में जानकारी जुटाई जाएगी। अध्यापकों को इस प्रशिक्षण शिविर में रुचि लेने के आदेश जारी किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बुधवार को वे स्वयं प्रशिक्षण शिविर में उपस्थित रहेंगे।