लंबे समय से विभागों के बीच उलझ कर रह गए महाभारतकालीन सूरजकुंड में पानी लाने का मसला अब सुलझ गया है। जनस्वास्थ्य विभाग को यह जिम्मेवारी दी गई है। सूरजकुंड में लगभग 94 लाख रुपये की लागत से गुहला माइनर से पानी आएगा। जिसके लिए विभाग द्वारा प्रोजैक्ट तैयार कर लिया गया है। जिसे स्वीकृति के लिए विभाग मुख्यालय भेज दिया है। यह मामला लंबे समय से अटका हुआ था।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कैथल की नई अनाज मंडी में पिछले साल आयोजित रैली में ऐलान किया था कि सरकार द्वारा ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व के सूरजकुंड में पानी भरा जाएगा। ताकि इसका पौराणिक वैभव लौट सके। इस समय तीर्थ का जीर्णोद्धार कार्य लगभग पूरा हो गया है। इसके चारों ओर पत्थर भी लगाया जा चुका है। इसमें पानी ना आने के कारण श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हो रही थीं।
मुख्यमंत्री के ऐलान के बाद विभागों में अटका था मामला
मुख्यमंत्री के ऐलान के बाद विभागों के बीच यह मामला लटका हुआ था। पहले यह सिंचाई विभाग के पास भेजा गया। लेकिन सिंचाई विभाग ने इस काम को करने से हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद फिर जनस्वास्थ्य विभाग को कहा गया। इस तरह से करीब छह माह तक फाइल विभाग दर विभाग घूमती रही। बाद में डीसी के हस्तक्षेप के बाद मामला निपटा और जनस्वास्थ्य विभाग को यह जिम्मेवारी दी गई।
गुहला माइनर से आएगा पानी
विभाग ने निर्देश मिलने के बाद इस संबंध में प्रोजैक्ट तैयार किया। सूरजकुंड शहर के बीचों-बीच स्थित है। पहले इसके लिए क्योड़क माइनर से पानी लाने पर विचार किया गया था। लेकिन बाद में गुहला माइनर से पानी लाने की परियोजना तैयार की गई है। पटियाला रोड पर ड्रेन पार गुहला माइनर से पानी लाए जाने की योजना है। इसके लिए करीब 4 किलोमीटर एरिया में ड्रेन पार करते हुए पाइपलाइन के माध्यम से सूरजकुंड में पानी भरा जाएगा।
ऐतिहासिक महत्व है सूरजकुंड का, पानी आने से मिलेगी श्रद्धालुओं को राहत
सूरजकुंड सूर्य मंदिर के महंत राजेश्वरपुरी महाराज ने कहा कि इस सूरजकुंड का निर्माण भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत युद्ध के बाद कैथल में बनाए गए नवग्रह कुंडों के साथ करवाया था। यहां आज भी प्राचीन सूर्य मंदिर है। भगवान सूर्य का मंदिर आस-पास कहीं नहीं है। साथ ही इस तीर्थ में ऐतिहासिक मनसा देवी मंदिर था। जिसे अब दोबारा से बनवाया जा रहा है। तीर्थ में चारों ओर पत्थर लगाए जाने का काम पूरा हो गया है। पानी लाए जाने की योजना लंबे समय से अटकी हुई है। यदि जनस्वास्थ्य विभाग शीघ्रता से इस काम को पूरा कर देता है तो श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलेगी। यहां शीतला माता मंदिर भी है। साथ ही बाजीगर समुदाय की कुलदेवी का मंदिर भी यहां है। हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
विभाग ने इस संबंध में अनुमानित लागत के साथ प्रोजैक्ट रिपोर्ट बनाकर मुख्यालय भेज दी है। जैसे ही मंजूरी मिल जाती है उसी अनुसार यहां काम शुरू कर दिया जाएगा। गुहला माइनर से सूरजकुंड में पानी लाया जाएगा। इसके लिए करीब 94 लाख रुपये का प्रोजैक्ट तैयार किया गया है।
विनोद सरोहा, कार्यकारी अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग