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Kaithal News: कुंभ राशि में रहकर सूर्य-शनि बना रहे अद्वितीय योग

Tue, 25 Feb 2025 01:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कलायत। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार भगवान शिव की अत्यंत प्रिय रात को शिवरात्रि कहते हैं। शिव पुराण की ईशान संहिता के अनुसार, फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की रात को आदिदेव भगवान शिव करोड़ों सूर्यों के समान तेज वाले लिंग रूप में प्रकट हुए थे। महाशिवरात्रि का पर्व शिवभक्तों द्वारा अत्यंत श्रद्धा व भक्ति से मनाया जाता है।

बन रहे महासंयोग : पं. विशाल शांडिल्य ने बताया कि इस साल महाशिवरात्रि पर ग्रहों का महासंयोग बनने जा रहा है। 26 फरवरी को शनि की राशि कुंभ में त्रिग्रही योग बनेगा, जो चार राशि मेष, मिथुन, सिंह और कुंभ वालों के लिए अद्भुत शुभ फलदायी साबित हो सकता है।
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26 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन कुंभ राशि में ग्रहों का दुर्लभ संयोग बन रहा है। शिवरात्रि के दिन सूर्य, बुध और शनि ग्रह एकसाथ कुंभ राशि में रहकर त्रिग्रही योग बनाएंगे साथ ही चंद्रमा मकर राशि में रहेंगे। इससे पहले 1965 में ऐसा दुर्लभ संयोग बना था।

महाशिवरात्रि का धार्मिक महत्व : शांडिल्य ने बताया की महाशिवरात्रि के दिन, शास्त्रों के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह सम्पन्न हुआ था। इस दिन उपवास, रात्रि जागरण और शिव पूजन करने से विशेष लाभ की प्राप्ति होती है। महाशिवरात्रि के अवसर पर भक्तों को कुछ विशेष नियमों का पालन करते हुए पूजा करनी चाहिए।

दुर्लभ ग्रह संयोग का क्या है महत्व

ज्योतिष अनुसार, सूर्य को पिता और शनि को पुत्र का प्रतीक माना जाता है। इस बार दोनों ग्रह शनि की राशि कुंभ में स्थित रहेंगे जिससे एक शक्तिशाली और अद्वितीय योग का निर्माण होगा। ऐसा ग्रह संयोग दशकों में एक बार ही बनता है और इसे विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत माना जाता है। महाशिवरात्रि पर बनने वाला यह संयोग शिव भक्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है। महाशिवरात्रि पर शिवलिंग का रुद्राभिषेक अवश्य करना चाहिए। साथ ही 108 राम नाम लिखा बेलपत्र अगर भगवान शिव के शिवलिंग पर अर्पण करते हैं तो भगवान भोलेनाथ बेहद प्रसन्न हो जाएंगे। जिससे शिव कृपा प्राप्त करने की संभावना बढ़ जाती है।
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n शिवलिंग का जल, दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से अभिषेक करें।

n बिल्व पत्र और फूल अर्पित करें क्योंकि शिवजी को बिल्व पत्र अत्यंत प्रिय होते हैं।

n नम: शिवाय, महामृत्युंजय मंत्र या शिव रुद्र मंत्र का जाप करें।

n रुद्राभिषेक करें। यह पूजा भगवान शिव को प्रसन्न करने का सर्वोत्तम उपाय माना जाता है।

कब मनाया जाएगा पर्व

पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि महाशिवरात्रि का व्रत इस बार बुधवार 26 फरवरी को रखा जाएगा। दरअसल 25 फरवरी की मध्यरात्रि ही फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का आरंभ हो जाएगा।
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