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Kaithal News: प्रदेश के पहले संस्कृत विश्वविद्यालय में शुरू होगी पढ़ाई

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मूंदड़ी में निर्माणाधीन  महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय का  भवन - फोटो : ऊंचाहार ब्लॉक में मंगलवार को चस्पा पंचायत चुनाव की अंतिम सूची को देखते लोग।
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कैथल। मूंदड़ी में 22 एकड़ में बन रहे महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के नए भवन का निर्माण कार्य मार्च 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा। अभी तक भवन का 80 प्रतिशत कार्य पूरा किया गया है। परिसर में कक्षाएं शिफ्ट होने के बाद परिसर में ही एक स्कूल की स्थापना भी की जाएगी, जिसमें कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों को शिक्षा दी जाएगी। इस स्कूल को संचालित करने के लिए विवि प्रशासन ने हाल ही में एक कमेटी का भी गठन किया है। स्कूल में आने वाले विद्यार्थियों को संस्कृत माध्यम में शिक्षा दी जाएगी जबकि अंग्रेजी और हिंदी एक-एक अनिवार्य विषय के रूप में शामिल रहेंगे। विवि भवन के निर्माण कार्य पर कुल 180 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। भवन तैयार न होने की स्थिति में इस समय विश्वविद्यालय की कक्षाएं फिलहाल टीक स्थित एक निजी संस्थान के भवन में संचालित की जा रही हैं।
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फिलहाल सरस्वती कॉलेज टीक में चल रहीं कक्षाएं
यह विश्वविद्यालय प्रदेश का पहला संस्कृत विवि है। इसकी स्थापना की घोषणा साल 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने घोषणा की थी। 2018 में विश्वविद्यालय शुरू हुआ लेकिन तब से अब तक यह अलग-अलग किराये के भवनों में संचालित होता आ रहा है।

वर्तमान में वीसी कार्यालय, रजिस्ट्रार कार्यालय, परीक्षा शाखा आदि डॉ. बीआर राजकीय कॉलेज जगदीशपुरा में संचालित हो रहे हैं। जबकि कक्षाएं सरस्वती कॉलेज टीक में लगती हैं।
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विवि में 20 कोर्स हैं और लगभग 650 विद्यार्थी हरियाणा, हिमाचल, बिहार, दिल्ली, उत्तराखंड, यूपी और पंजाब से अध्ययन कर रहे हैं। विवि में संस्कृत व्याकरण और साहित्य में स्नातक और स्नातकोत्तर के अतिरिक्त, वेद, ज्योतिष, व्याकरण, साहित्य, दर्शन, हिंदू अध्ययन, धर्मशास्त्र और योग में भी डिग्री पाठ्यक्रम शुरु किया है। योग, कर्मकांड, ज्योतिष एवं वास्तु में डिप्लोमा पाठ्यक्रम भी शुरु किए गए हैं।
विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप कैंपस स्कूल आरंभ किया जाएगा। यह विद्यालय कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए होगा, जहां उन्हें गुरुकुल परंपरा की नैतिक शिक्षा दी जाएगी। अब तक विवि भवन का निर्माण कार्य 80 प्रतिशत तक कार्य पूरा किया जा चुका है। मार्च 2026 तक 100 प्रतिशत तक कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इससे पहले जनवरी से ही नए भवन में कक्षाएं शुरू कर दी जाएंगी। -प्रो. राजबीर सिंह, वीसी, महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय, कैथल।

मॉडल संस्कृति कॉलेज बनने से कॉलेज में आधुनिक लैब खोली जाएंगी। विद्यार्थियों के लिए सुविधाएं बढ़ाने के साथ ही नए कोर्स भी शामिल होंगे। कॉलेज को मॉडल संस्कृति बनने के बाद बाकी कॉलेज भी इसका अनुसरण करेंगे और इसके उपरांत उन कॉलेजों को भी मॉडल संस्कृति बनाया जाएगा।

-कॉलेज प्राचार्य डॉ. मनोज भांभू
शिक्षा को अधिक प्रभाव बनाने के लिए उद्योग अकादमिक सहायोग को सशक्त किया जाना आवश्यक है. जिससे शिक्षा सीधे रोजगार से जुड़ सके। -छतर पाल सिंह, डीएमएस।
उपलब्धियां
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बच्चों के लिए पजल बुक (पहेली पुस्तक) लॉन्च की।

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गणित किट की ट्रेनिंग शुरु की। इसका उद्देश्य शिक्षकों को गणितीय अवधारणाओं को प्रभावी ढंग से समझाने के लिए किट का उपयोग करने का प्रशिक्षण देना है।

n नेशल मेन्स मेरिट परीक्षा की तैयारी करवाई गई। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के मेधावी छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।

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उल्लास योजना (समाज में सभी के लिए आजीवन सीखने की समझ) में कैथल जिला नंबर -1 पर रहा। इसका लक्ष्य 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी निरक्षर वयस्कों को बुनियादी साक्षरता, संख्यात्मक ज्ञान, जीवन कौशल और डिजिटल व वित्तीय साक्षरता प्रदान करना है
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