संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय में शिक्षकों की भारी कमी के कारण छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। शैक्षणिक सत्र शुरू हुए 10 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अधिकांश विभागों में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो सकी है। विश्वविद्यालय में फिलहाल मात्र सात शिक्षक कार्यरत हैं, जो बीए, एमए और डिप्लोमा की सभी कक्षाओं को संचालित करने में असमर्थ हैं।
इस स्थिति से नाराज छात्रों ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और भगत सिंह विद्यार्थी परिषद के बैनर तले मोर्चा खोलते हुए कुलपति के नाम कुलसचिव को ज्ञापन सौंपा।
छात्र नेता साहिल भारद्वाज ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि संस्कृत जैसे समृद्ध विषय की पढ़ाई के लिए स्थापित विश्वविद्यालय में अध्यापक ही नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बीते आठ वर्षों में न तो भवन निर्माण हुआ और न ही पर्याप्त शिक्षक नियुक्त किए गए, जिससे स्पष्ट है कि विश्वविद्यालय प्रशासन गहरी नींद में सोया हुआ है।
बीएसवीपी नेता रवि ने चेतावनी दी कि यदि 72 घंटों के भीतर सभी कक्षाओं में शिक्षक नियुक्त नहीं किए गए, तो छात्र संगठन विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर तालाबंदी करने को मजबूर होंगे।
छात्रों ने कहा कि वे दूर-दराज से शिक्षा प्राप्त करने के लिए यहां आते हैं, लेकिन उन्हें खाली कक्षाएं दी जा रही हैं। यह न केवल समय की बर्बादी है, बल्कि भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अन्याय को चुपचाप स्वीकार नहीं करेंगे और आवश्यकता पड़ी तो सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे। इस अवसर पर साहिल भारद्वाज, विष्णु, सैनिक, मुकुल, रवि सहित अनेक छात्र उपस्थित रहे।