कैथल। शहर के विभिन्न पार्कों में पढ़ाई करने के नाम पर आने वाले छात्र अब ऑनलाइन गेमिंग का शिकार बनते जा रहे हैं। जवाहर लाल पार्क और चिल्ड्रन पार्क में दिन के समय कॉलेज और स्कूल के तमाम छात्र मोबाइल पर गेम खेलते नजर आते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन गेमिंग युवा पीढ़ी पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है, खासकर उन छात्रों पर जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर इन गेम्स का व्यापक प्रचार किया जा रहा है। इन गेम्स में कम समय में अधिक पैसे कमाने का प्रलोभन दिया जाता है। शुरुआत में छात्र इसे शौकिया तौर पर खेलते हैं, लेकिन धीरे-धीरे यह लत बन जाती है और कई बार वे हजारों से लाखों रुपये तक गंवा देते हैं।
कई युवाओं की आर्थिक स्थिति खराब होती जा रही है और कर्जा बढ़ता जा रहा है। परिजनों के पूछने पर भी छात्र अपनी ऑनलाइन गतिविधियों के बारे में जानकारी नहीं देते। कुछ मामले तो तब सामने आते हैं जब बच्चे गलत कदम उठाते हैं। ऐसे में परिजन सरकार से ऑनलाइन गेमिंग पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब जुआ और सट्टा अपराध हैं, तो ऑनलाइन गेम पर रोक क्यों नहीं लगाई जा रही।
एसपी उपासना ने कहा कि कई गेमिंग प्लेटफॉर्म इस तरह डिजाइन किए जाते हैं कि खिलाड़ी धीरे-धीरे उनमें लिप्त हो जाते हैं। कुछ गेम्स निजी जानकारी और बैंक डिटेल मांगकर ठगी करते हैं, वहीं कई “रियल मनी गेम्स” युवाओं को आर्थिक नुकसान की ओर धकेलते हैं। हार के बाद मानसिक दबाव में आकर छात्र गलत कदम उठा सकते हैं, चोरी या अन्य आपराधिक गतिविधियों में फंस सकते हैं।
एसपी ने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें। किसी भी अनजान लिंक या ऐप को डाउनलोड न करें।
ऑनलाइन गेमिंग - इसका मतलब है इंटरनेट या कंप्यूटर नेटवर्क के ज़रिए इलेक्ट्रॉनिक गेम खेलना, जिसमें एक या एक से ज़्यादा खिलाड़ी शामिल हो सकते हैं। यह गेमिंग के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है और इसमें पीसी, कंसोल और मोबाइल जैसे कई प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
ऑनलाइन गेम की आदत बेहद हानिकारक है। युवा और बच्चे गेमिंग में अपना कीमती समय बर्बाद करने के साथ-साथ जमा पूंजी और उधार लिए गए पैसे भी गंवा रहे हैं। मोबाइल गेमिंग अवसाद, माइग्रेन और अन्य मानसिक व शारीरिक बीमारियों का कारण बन सकती है। -डॉ. राजेश कुमार, मनोचिकित्सक