डीएवी काले चीका में चल रही खेल नर्सरी में प्रैक्टिस करके सिर्फ चार साल में 57 बच्चे सेना, बीएसएफ व पुलिस में विभिन्न नौकरियों पर लग गए। स्थानीय व बाहरी कालेजों में होने वाली प्रतियोगिताओं में बच्चे सैकड़ों मेडल ले आए लेकिन डीएवी कालेज को फिर भी अपने यहां खेल नर्सरी नहीं चाहिए। कालेज प्रशासन ने जिला खेल विभाग को लिखकर भेजा है कि वह खेल नर्सरी के लिए अपने यहां जगह दे पाने में असमर्थ हैं इसलिए नर्सरी यहां से उठा ली जाए। यह सूचना मिलते ही विद्यार्थियों में रोष फैल गया। नारेबाजी करते हुए विद्यार्थियों ने कालेज के मेन गेट को ताला जड़ दिया तथा चीका गुहला मार्ग को जाम कर दिया।
डीएवी कालेज के बाहर मेन रोड पर धरने पर बैठे बच्चों को समझाने गुहला पुलिस के अधिकारी आए लेकिन उन्होंने रास्ता खाली करने से इंकार कर दिया। बच्चों ने कहा कि कालेज प्रशासन पहले यह तो बताए कि खेल नर्सरी से उसे तकलीफ क्या है। उन्होंने कहा कि इस खेल नर्सरी के बूते 57 बच्चे पक्की सरकारी नौकरियों पर लग गए हैं तथा 250 से 300 बच्चे अपने बेहतर भविष्य के लिए रोज यहां सुबह शाम प्रैक्टिस करते हैं।
मांगा दो दिन का समय
कुछ लोगों ने मध्यस्थता करके छात्रों व कालेज प्रिंसिपल की आमने सामने बात करवाई। छात्र इस बात पर अड़े रहे कि कालेज में खेल नर्सरी चलती रहनी चाहिए। क्योंकि यह गरीब युवाओं के लिए रोजगार पर लगने की उम्मीद साबित हो रही है। कालेज प्रशासन ने यह कहकर उन्हें टालने की कोशिश की कि कोच सरकारी है तथा नर्सरी भी सरकार के खेल विभाग की है। इसलिए यह कहीं और भी हो सकती है। कालेज अनुशासन सहित कई कारणों से अपना ग्राउंड इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दे सकता। छात्रों के यह करने पर कि नर्सरी चलेगी तो कालेज को चलने देंगे, कालेज प्रशासन ने समस्या के समाधान के लिए दो दिन का वक्त मांग लिया। दो दिन की बात होने के बाद छात्रों ने जाम खोल दिया।
बाहरी छात्र हैं समस्या : प्रिंसिपल
इस संबंध डीएवी कालेज चीका के प्रिंसिपल रमेश लाल ढांढा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि कालेज को समस्या खेल नर्सरी से नहीं बल्कि बाहरी छात्रों से है जो कि यहां आकर प्रेक्टिस करते हैं। उन्होंने कहा कि इसी कारण से कालेज का अनुशासन भंग होने का अंदेशा रहता है। इसी कारण से खेल विभाग से नर्सरी बंद करने को कहा गया है।
कालेज टाइम के बाद होती है प्रैक्टिस : कोच
खेल कोच सतनाम सिंह ने कहा कि बच्चों को खेल की प्रेक्टिस सुबह 4 से 7 व शाम को 4 से 6 बजे तक करवाई जाती है। इस दौरान कालेज की क्लासें नहीं होती इसलिए अनुशासन बिगड़ने वाली कोई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि हर रोज 250 से 300 लड़के लड़कियां प्रैक्टिस करने आते हैं इनमें से सिर्फ पांच इसी कालेज के पुराने छात्र हैं। पिछले चार सालों में प्रैक्टिस करने वाले बच्चों की तरफ से एक भी हरकत ऐसी नहीं हुई है, जिसे अनुशासन भंग करने की श्रेणी में डाला जा सके।