संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। इंस्पायर मानक अवॉर्ड पंजीकरण शुरू हो गए हैं। इसके लिए कक्षा छठी से 10वीं विद्यार्थी अपना आइडिया भेज सकते हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से बच्चों के लिए इंस्पायर अवॉर्ड मानक योजना शुरू की गई। इसके तहत विद्यार्थियों से उनके वैज्ञानिक आइडिया मांगे गए हैं।
यह जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी विजय लक्ष्मी ने दी। उन्होंने बताया कि एक जुलाई 2024 से देश व प्रदेश के राजकीय व निजी स्कूलों पढऩे वाले मेधावी छात्र जिनकी आयु 10-15 वर्ष के बीच हैं, व जो विधार्थी कक्षा छठी से दसवीं के छात्र-छात्रा है। उनके वैज्ञानिक आइडिया प्रतियोगिता के लिए आमंत्रित किए गए हैं। इंस्पायर अवार्ड मानक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार का एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है।
इसका उद्देश्य मेधावी छात्रों में विज्ञान की पढ़ाई के प्रति रुचि पैदा करना व वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए आकर्षित करना है।
कार्यक्रम के तहत कक्षा 6 से 10वीं के मेधावी छात्र जिनके आइडिया चयनित होते हैं, उनको दस हजार रुपये की राशि प्रदान की जाती है। इस राशि का उपयोग छात्रों द्वारा विज्ञान का एक प्रोजेक्ट या मॉडल बनाने व उसे जिला स्तरीय प्रदर्शनी प्रतियोगिता स्थल तक प्रदर्शित करने के लिए किया जाता है।
इंस्पायर मानक अवॉर्ड की रुपरेखा भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा राष्ट्रीय नवपवर्तन प्रतिष्ठान द्वारा देशभर से आने वाले सर्वश्रेष्ठ एक लाख विचारों का चयन किया जाएगा। इन चयनित विद्यार्थियों को 10 हजार रुपये प्रति पुरस्कार राशि उनके बैंक खाते में डाली जाएगी।
जिला शिक्षा अधिकारी विजय लक्ष्मी ने बताया कि वैज्ञानिक विचारों का चयन उनकी नवीनता व्यावहारिकता सामाजिक उपयोगिता पर्यावरण की अनुकूलता और वर्तमान में मौजूद तकनीकी से बेहतरी के आधार पर होगा, उसके बाद पूरे भारत से जिला स्तरीय प्रदर्शनी और प्रोजेक्ट प्रतियोगिता करवाकर एक लाख नवपवर्तन में से 10 हजार नवपवर्तनों का चयन किया जाएगा। इसके पश्चात राज्य स्तरीय प्रदर्शनी और प्रोजेक्ट प्रतियोगिता करवा कर 10000 नवपवर्तन में से चयनित 1000 प्रतिकृति को राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनी में रखा जाएगा। जहां से श्रेष्ठ 60 को राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चयनित किया जाएगा, जिसमें राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया जएगा। इस कार्यक्रम के संदर्भ में जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. विजय लक्ष्मी ने कहा कि इंस्पायर मानक अवार्ड के माध्यम से विद्यार्थियों में नवाचार का सृजन होगा व विद्यार्थियों में वैज्ञानिक नजरिया विकसित होगा व बच्चों में समस्या को हल करने की दक्षता बढ़ेगी।