ाजकीय कॉलेज चीका में पढ़ाने के लिए स्टाफ सदस्य ना होने के कारण छात्राओं ने मंगलवार को जमकर प्रदर्शन किया। साथ ही राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। छात्राओं ने दो दिन का अल्टीमेटम दिया है। जिसमें स्टॉफ पूरा ना होने पर चीका चौक जाम करने की चेतावनी दी है।
छात्राओं का कहना है कि सरकार ने वाहवाही लूटने के लिए चीका में लड़कियों का कालेज तो खोल दिया पर शिक्षक स्टाफ आज तक नहीं पूरा किया। छात्राएं रोजाना कालेज में वक्त जाया करके घर लौट जाती हैं। छात्राओं ने कालेज प्रिंसिपल पर भी अभद्र व्यवहार करने के आरोप लगाए। प्रिंसिपल की गैर मौजूदगी में कुछ अध्यापकों द्वारा समझाए जाने के बाद छात्राएं अपनी कक्षाओं में तो लौट गई मगर उन्होंने कालेज प्रशासन को दो दिन का अल्टीमेटम दे दिया कि या तो दो दिन के भीतर भीतर स्टाफ पूरा कर दो वरना तीसरे दिन वह चीका चौक पर जाम लगा देंगी। छात्रा मधु, तरुणा, नवदीप, रिंपल, रीमाए, मनप्रीत, प्रिया, साक्षी, अंजलि, सरबजीत, रितु आदि ने बताया कि वे पिछले दो सालों से इस कालेज में पढ़ने के लिए आ रही हैं लेकिन पहले दिन से ही कालेज में अंग्रेजी हिंदी जैसे मुख्य विषयों के भी शिक्षक नहीं हैं। छात्राओं ने बताया कि वे सोमवार को अपने लेक्चर न लगने की शिकायत लेकर प्रिंसिपल के पास गई थीं, लेकिन प्रिंसिपल ने कहा कि आप से टीचरों की खुद कोई व्यवस्था होती हो तो कर लो उनके बस में टीचर लाना नहीं है। छात्राओं ने बताया कि मंगलवार सुबह जैसे ही यह बात अन्य लड़कियों में फैली तो सबका गुस्सा फूट पड़ा। सुबह कालेज खुलते ही सैकड़ों छात्राएं कालेज गेट के बाहर आ गई और कालेज प्रशासन व प्रदेश सरकार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया।
कालेज दफ्तर से हासिल आंकड़ों के अनुसार कालेज में अंग्रेजी के तीन प्राध्यापकों के पद स्वीकृत हैं, मगर है एक भी नहीं। इसी तरह हिंदी के 2, अर्थशास्त्र के 1, मनोविज्ञान के 1, सामाजिक विज्ञान के 1 प्राध्यापक के पद स्वीकृत हैं मगर इन विषयों का कोई भी प्राध्यापक लंबे समय कालेज में नहीं है। गणित जैसे महत्वपूर्ण विषय को पढ़ाने के लिए कालेज में महज एक शिक्षक हैं, जबकि वर्कलोड 2 पदों का है। पंजाबी के लिए दो अध्यापकों की जरूरत है, मगर कालेज में एक ही शिक्षक से काम चलाया जा रहा है।
गुस्साई छात्राओं ने कहा कि कालेज के टायलेट का हाल इतना बुरा है कि उनको प्रयोग करना तो दूर उनके सामने से गुजरना भी दूभर होता है। उन्होंने बताया कि लाइब्रेरी और कंप्यूटर रूम पर कालेज प्रशासन हमेशा ताला ठोककर रखता है। कालेज में न तो कोई कैंटीन है और ना ही पानी की सही व्यवस्था, कालेज के बाहर छात्राओं को लेने के लिए बसें नहीं रुकती। डीसी कैथल के संज्ञान में लाने के बावजूद स्थिति जस की तस है।
कालेज के मंगलवार के इंचार्ज प्राध्यापक दर्शन सिंह का कहना है कि प्रिंसिपल स्टाफ की समस्या को लेकर ही शिक्षा निदेशालय चंडीगढ़ गए हैं। कालेज में 28 शिक्षकों का वर्क लोड है, पर अध्यापक केवल 10 ही हैं। 5 टीचर डेपुटेशन पर सरकार ने यहां भेजे थे, पर अब वे अपने मूल स्टेशन पर चले गए हैं इसलिए ज्यादा परेशानी आ रही है।