कैथल। एसडीएम अजय सिंह ने गांव बाबालदाना और बरटा का दौरा कर किसानों को जागरूक करते हुए कहा कि किसान फसल कटाई के बाद बचे अवशेषों में आग न लगाएं, बल्कि पराली का वैज्ञानिक प्रबंधन करें। इससे न केवल पर्यावरण प्रदूषण रोका जा सकता है, बल्कि किसान अपनी आय में भी वृद्धि कर सकते हैं। इस मौके पर डीएसपी सुशील प्रकाश भी मौजूद रहे। एसडीएम ने कहा कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा गोष्ठियों और शिविरों के माध्यम से गांव-गांव जाकर किसानों को पराली प्रबंधन के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पराली जलाने से कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, मीथेन सहित कई हानिकारक गैसें निकलती हैं, जिनसे सांस की बीमारियां, आंखों में जलन, दमा और हृदय रोग बढ़ जाते हैं। साथ ही, धुएं के कारण दृश्यता घटने से सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है।उन्होंने कहा कि पराली जलाने से मिट्टी के जीवाणु नष्ट हो जाते हैं और उसकी उर्वरा शक्ति घट जाती है। पराली प्रबंधन के लिए सुपर सीडर, सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) और अन्य आधुनिक मशीनें किसानों की मदद कर सकती हैं। एसडीएम ने बताया कि पराली से बायोगैस, बायो-सीएनजी और बिजली उत्पादन किया जा रहा है। किसान बेलर व अन्य मशीनों की मदद से पराली को प्रबंधित कर अतिरिक्त आय का स्रोत बना सकते हैं। संवाद
उन्होंने कहा कि जो किसान पराली प्रबंधन करते हैं, उन्हें सरकार की ओर से 1200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है।