नगर परिषद कैथल की हद में मुख्य मार्गों पर लगी स्ट्रीट लाइटें खराब होती रहीं, लेकिन स्थानीय अधिकारियों ने मेंटेनेंस की जहमत नहीं उठाई। इस संबंध में पूछने पर राज्यस्तरीय एजेंसी को टेंडर देने की बात कहकर स्थानीय अधिकारी पल्ला झाड़ते रहे। नतीजतन अधिकांश क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी है और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अब 22 जून को टेंडर जारी होने के बाद स्ट्रीट लाइटों के ठीक होने की आस जगी है।
वर्ष 2020 में स्थानीय निकाय विभाग ने राज्यस्तर पर स्ट्रीट लाइट का काम देने का फैसला लिया गया था। इसके लिए राज्यस्तरीय एजेंसी को पूरी रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा गया था। साथ ही पत्र जारी करके एक साथ काफी संख्या में नई स्ट्रीट लाइटें खरीदने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इस पत्र के आने के साथ ही जिलास्तर पर अधिकारियों ने लाइटों की ओर ध्यान देना ही छोड़ दिया, जिसका नतीजा यह हुआ कि मुख्य मार्गों पर खराब हुई लाइटों की संख्या बढ़कर आज सैकड़ों में हो गई है। शहर में करनाल रोड, ढांड रोड, अंबाला रोड, चीका रोड, जींद रोड पर कई लाइटें खराब हैं। कुतुबपुर ओवरब्रिज पर भी लाइटें पूरी तरह से बंद पड़ी हैं। उनके लिए कोई बिजली का ही प्रबंध नहीं है। रेलवे अंडर ब्रिज जींद रोड पर लाइटें ही नहीं हैं। मुख्य मार्गों से अनेकों पोल भी लापता हैं, लेकिन नगर परिषद के अधिकारी इस ओर ध्यान ही नहीं दे रहे। पूछने पर उनकी ओर से रटा-रटाया जवाब होता है कि राज्यस्तरीय एजेंसी को टेंडर दिया गया है, वही एजेंसी काम करेगी।
जब राज्यस्तर पर इस योजना के नोडल अधिकारी से बात कर राज्यस्तरीय एजेंसी द्वारा काम शुरू न करने का कारण पूछा गया तो उन्होंने बताया कि जो स्ट्रीट लाइट पहले से लगी हैं, उन्हें रिपेयर करने के लिए कभी मना नहीं किया गया। विभाग मुख्यालय की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि विशेष परिस्थितियों में अनुमति लेकर भी स्ट्रीट लाइट लगाई जा सकती है, जबकि पुरानी लाइटों के मेंटेनेंस की जिम्मेदारी स्थानीय स्तर पर ही है।
हमने कभी नहीं कहा कि मेनटेनेंस भी नहीं करनी
राज्य नोडल अधिकारी एक्सईएन गौरव आनंद ने कहा कि राजस्थान की एजेंसी को वर्ष 2020 में इस मामले में डीपीआर तैयार करने का काम दिया गया था। इस एजेंसी ने दिसंबर में रिपोर्ट जमा करवाई। अब 22 जून को इस योजना के तहत टेंडर हो गए हैं। तकनीकी निरीक्षण चल रहा है। उम्मीद है कि एक माह के अंदर स्ट्रीट लाइटों को दस साल के लिए एजेंसी के हवाले कर दिया जाएगा। विभाग ने पुरानी लाइटों की रिपेयर पर कभी रोक नहीं लगाई। यदि वे नहीं करवा रहे तो गलत है। यह उन्हीं की जिम्मेदारी है। हां वे एक साथ बड़ी संख्या में लाइटें नहीं खरीद सकते।
स्थानीय अधिकारियों के पास नहीं है जवाब
एक्सईएन हिमांशु लाटका से सीधी बात ----
प्रश्न : राज्य नोडल अधिकारी ने कहा है कि रिपेयर पर रोक नहीं लगाई तो कैथल शहर की लाइटों की रिपेयर क्यों नहीं करवाई जा रही?
-पहले राज्यस्तरीय एजेंसी के आने की सूचना थी, बाद में दस लाख रुपये की अनुमति ली है। यह राशि मंजूर होते ही रिपेयर का काम शुरू करवा दिया जाएगा।
प्रश्न : दस लाख रुपये की अनुमति की बात भी कई माह से सुनी जा रही है, यह दस लाख रुपये की अनुमति किस स्तर पर लंबित है?
-एक पोर्टल है, विभाग का, उस पर लंबित है? इसे जल्द अप्रूव करवाया जाएगा।
प्रश्न : पोर्टल भी कोई अधिकारी ही चला रहे होंगे, आप अधिकारी का नाम बताएं, ताकि उनसे बात की जा सके?
-इस संबंध में बुधवार को डीएमसी सर से बात करके मसले का हल निकाला जाएगा।
प्रश्न : नोडल अधिकारी का कहना है कि रिपेयर करवाना या विशेष अनुमति लेकर काम करना स्थानीय अधिकारियों का काम है? तो कैथल में यह काम क्यों नहीं किया जा रहा?
-जल्द ही अधिकारियों से बात करके इस दिशा में काम किया जाएगा।
डीएमसी समवर्तक सिंह ने कहा कि दस लाख रुपये की अनुमति लेकर शीघ्र ही रिपेयर का काम किया जाएगा। राज्यस्तर पर कई बार इसके लिए लिखा जा चुका है। उम्मीद है कि जल्द ही काम शुरू किया जाएगा।