संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। शहर में बेसहारा कुत्तों को पकड़ने वाली एजेंसी का टेंडर रद्द होने से शहर में नसबंदी और एंटी-रेबीज टीकाकरण ठप है। नगर परिषद अधिकारियों के अनुसार एजेंसी द्वारा तय नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था और लगातार शिकायतें मिल रही थीं, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई थी।
शहर में करीब 10 हजार लावारिस कुत्तों का अनुमान है, लेकिन एजेंसी अब तक केवल 502 कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण ही कर सकी थी। पिछले करीब एक महीने से अभियान पूरी तरह बंद है और अभी तक नया टेंडर जारी नहीं किया गया है।
जिले के आंकड़ों के अनुसार 12,450 अनुमानित लावारिस कुत्तों में से अब तक 2,952 का टीकाकरण और नसबंदी की जा चुकी है। इनमें कैथल में 502, राजौंद में 350, कलायत में 400, पूंडरी में 500, चीका में 700 और सीवन में 500 कुत्तों पर कार्रवाई हुई है। प्रशासन ने ग्रामीण क्षेत्रों में भी अभियान शुरू करने की योजना बनाई है। जिले के 278 गांवों में करीब 15 हजार आवारा कुत्तों का अनुमान है, जिसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है, हालांकि विस्तृत सर्वे अभी बाकी है।
काटने के मामलों में कमी नहीं : कुत्तों के काटने की घटनाओं में भी कमी नहीं आई है। जनवरी 2026 में करीब 250 लोग अस्पताल पहुंचे, जबकि फरवरी में यह संख्या लगभग 205 रही। वर्ष 2025 में भी हर महीने 180 से 326 लोग कुत्तों के हमले का शिकार हुए।
एजेंसी ने जताई आपत्ति : एजेंसी संचालक सत्यप्रकाश का कहना है कि नगर परिषद ने बिना किसी पूर्व सूचना के टेंडर रद्द कर दिया। यदि कोई कमी थी तो उसे सुधार का मौका दिया जाना चाहिए था। उनका दावा है कि अभियान सफलतापूर्वक चलाया जा रहा था।
विशेषज्ञ की राय : विशेषज्ञ डॉ. संदीप के अनुसार बेसहारा कुत्तों के नियंत्रण के लिए उचित प्रबंधन जरूरी है। इसमें सुरक्षित आश्रय स्थल, नर-मादा व बीमार-स्वस्थ कुत्तों के लिए अलग व्यवस्था, नियमित सफाई, प्राथमिक उपचार कक्ष और पशु चिकित्सक की निगरानी अनिवार्य होनी चाहिए। नसबंदी के बाद कुत्तों को चिन्हित कर उसी क्षेत्र में छोड़ा जाना चाहिए।
नियमों का पालन न करने पर एजेंसी का टेंडर रद्द किया गया था। अभी नया टेंडर जारी नहीं किया गया। -संदीप सोलंकी, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद कैथल