गुहला-चीका। श्री भवानी मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन में आचार्य प्रेम मूर्ति प्रदीप महाराज ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। इस मौके पर महाराज ने बताया कि श्री वृंदावन तीर्थ नहीं भगवान का धाम है। जहां तीर्थों के राजा प्रयाग को भी अपने पाप धोने के लिए आना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि वृंदावन में भक्ति महारानी अपने पुत्र ज्ञान व वैराग्य के साथ नृत्य करतीं हैं। वृंदावन वह पवित्र भूमि है, जहां श्रीकृष्ण ने कंस की ओर से भेजे गए कई राक्षकों का वध कर उनका उद्धार किया। वहीं गोपियों संग महारास, माखन चोरी, ऊखल बंधन जैसी लीलाएं भी रची। आचार्य प्रेम मूर्ति प्रदीप ने कहा कि भगवान कृष्ण का जन्म लेते ही पहरेदार सो गए। वासुदेव व देवकी की बेड़ियां और कारागार के दरवाजे खुल गए। भगवान कृष्ण को लेकर वासुदेव गोकुल गए। गोकुल से योगमाया कन्या को लेकर कारागार में लौटे तो बेड़ियां बंध गईं और दरवाजे बंद हो गए, द्वारपाल जाग गए। अर्थात भगवान में पास में आते हैं तो सारे बंधन खुल जाते हैं लेकिन माया पास में आती है तो व्यक्ति बंधन में जकड़ जाता है। इसलिए भगवान के निकट रहिए।
लक्ष्य पवित्र और मन में सच्ची भक्ति हो तो ईश्वर भक्त के लिए कुछ भी कर सकते हैं। यही वजह थी कि भक्तों की रक्षा के लिए श्रीकृष्ण ने अपनी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को उठा लिया। इस मौके पर पार्षद बलवान रंगा, धर्मचंद, बलवंत पुनिया, सुरजीत सिंह, बलकार, वज़ीर सिंह पुनिया, जोगिंद्र पुनिया, माता राम गर्ग, डॉ. सुभाष पुनिया मौजूद रहे। संवाद