संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। हिंदू वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन कथा व्यास साक्षी गोपाल दास ने एक पतिव्रता स्त्री के चरित्र पर चर्चा की। कहा कि वैष्णव दृष्टांत से पतिव्रता स्त्री का दृष्टांत श्रेष्ठ है। वह निस्वार्थ भाव से अपने पति की सेवा करती है। अपने पति को ही वह अपना पूर्ण समर्पण करती है। वह अपने पति के परिवार के सदस्यों को स्नेह देती है।
उन्होंने कहा कि इसी प्रकार हमारे वैष्णवों ने कहा है कि हमें सम्मान सभी देवी देवताओं का करना चाहिए, लेकिन भक्ति केवल भगवान श्री कृष्ण की ही करनी चाहिए। अपना पूर्णतया समर्पण भगवान श्री कृष्ण को करना चाहिए। जिस प्रकार पति की निस्वार्थ सेवा करने से पति का गोत्र भी बदल जाता है उसी प्रकार जो व्यक्ति भगवान कृष्ण की सेवा एक पतिव्रता स्त्री की तरह करते हैं उनके गोत्र भी बदल जाता है।
भगवान के बड़े-बड़े भक्तों ने भी भक्तों का ही संग मांगा है, क्योंकि इस संसार में भगवान की भक्ति केवल भक्तों के संग में ही रहकर की जा सकती है। भक्तों के संग मात्र से ही हृदय में भक्ति महारानी प्रकट हो जाती है। भक्ति हमेशा सतोगुण में ही पैदा होती है। जिस व्यक्ति के अंदर थोड़ी सी भी भक्ति उत्पन्न हो जाती है उसकी संसार के भोगों के प्रति आसक्ति समाप्त हो जाती है। भगवान का शुद्ध भक्त ही भगवान की भक्ति प्राप्त कर सकता है। यह मायावादी व्यक्ति ही भगवान कृष्ण के चरणों के अपराधी होते हैं। जो भगवान कृष्ण की परम सत्ता को स्वीकार नहीं करते। वे मायावादी होते हैं। जबकि दूसरी तरफ भगवान कृष्ण का शुद्ध भक्त कुछ नहीं चाहता। वह भगवान से भी कुछ नहीं मांगता। वह हमेशा शांत रहता है।
कथा के यजमान प्रेम (दाल वाले) ने ज्योति प्रचण्ड कर, कथा व्यास को पुष्प माला से सम्मानित किया और कथा का श्रवण किया। प्रेस सचिव भारत मदान ने बताया कि प्रभु ने कथा में मीठे-मीठे भजन सुनाए और भक्तों ने उन भजनों पर नृत्य कर भगवान को प्रसन्न किया। कथा पंडाल में समिति के प्रधान दीपक अग्रवाल, राज गुलाटी, आशीष गर्ग, रामनिवास, संजय वाही, अमित गर्ग, रमेश कुमार, बलविंदर, नीरज गर्ग आदि मौजूद रहे।