संवाद न्यूज एजेंसी
राजौंद/कैथल। श्रावण मास 11 जुलाई से शुरू होकर 9 अगस्त तक चलेगा। यह जानकारी रामभगत हरित शर्मा ने दी। उन्होंने बताया कि 23 जुलाई को शिवरात्रि के अवसर पर सुबह 4 बजकर 40 मिनट से भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि श्रावण मास पूरी तरह भगवान शिव को समर्पित होता है। इस पवित्र माह में श्रद्धालु प्रतिदिन शिवलिंग पर जल चढ़ाकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं।
हरित शर्मा ने बताया कि 27 जुलाई को हरियाली तीज का पर्व मनाया जाएगा, जबकि नाग पंचमी 29 जुलाई को मनाई जाएगी। पवित्रा एकादशी का व्रत 5 अगस्त, मंगलवार को रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि श्रावणी कर्म और रक्षाबंधन का त्योहार 9 अगस्त, शनिवार को मनाया जाएगा। इस दिन कोई भद्रा नहीं रहेगी। श्रावण मास में सोमवार के व्रत का विशेष महत्व होता है।
मान्यता है कि सावन में भगवान भोलेनाथ व्रत और पूजा से प्रसन्न होकर भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। उन्होंने बताया कि इस माह में “ॐ नम: शिवाय” मंत्र के उच्चारण के साथ शिवलिंग पर बेलपत्र, पुष्प, दूध, दही, चावल और गंगा जल से अभिषेक करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। सावन का महीना पूरी तरह भगवान शिव को समर्पित होता है, जिसे शिवभक्त पूरे श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाते हैं।
सावन के सोमवार का विशेष महत्व होता है। इस दिन शिव भक्त उपवास रखते हैं और शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र आदि अर्पित कर जलाभिषेक करते हैं। सनातन परंपरा के अनुसार, देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु क्षीर सागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और इस अवधि में सृष्टि का संचालन भगवान शिव संभालते हैं। यह समय ‘चातुर्मास’ कहलाता है, जो पूरी तरह धर्म, तप, व्रत और संयम का प्रतीक है। ऐसे में सावन का महीना आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जाता है। भगवान शिव की आराधना से जीवन की समस्याएं दूर होती हैं और सुख-शांति की प्राप्ति होती है।
अब भक्तों को इंतज़ार है सावन के शुभारंभ की तारीख का, जब वे पूरे भक्ति भाव से भोलेनाथ की आराधना में जुट सकें।
सावन माह पर योग : इस बार सावन के पहले ही दिन एक विशेष योग बन रहा है, जिसे शिववास योग कहा जाता है। इस शुभ संयोग में भगवान शिव माता पार्वती के साथ कैलाश पर्वत पर विराजमान रहेंगे। मान्यता है कि इस योग में शिवजी की पूजा और जलाभिषेक करने से साधक को सौभाग्य, सुख-समृद्धि और मनचाहा वरदान प्राप्त होता है।
इसके बाद 09 अगस्त को सावन पूर्णिमा के साथ यह पावन महीना समाप्त होगा। इसी दिन रक्षाबंधन का त्योहार भी मनाया जाएगा।
पूजा विधि : सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस दौरान यदि सही विधि से पूजा की जाए, तो भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर और पूजा स्थल को साफ करें। फिर पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें।
शिवलिंग को गंगाजल और कच्चे दूध से स्नान कराएं। इसके बाद शुद्ध जल से धोकर साफ करें।
शिवलिंग पर बेलपत्र , धतूरा, सफेद पुष्प, भस्म, मिठाई और गाय का दूध अर्पित करें।
पूजन के दौरान ॐ नमः शिवाय मंत्र का 108 बार जप करें। चाहें तो शिव जी के 108 नामों का पाठ भी कर सकते हैं।
शिव चालीसा का पाठ करें और उसके बाद शिव आरती करें। अंत में हाथ जोड़कर भगवान शिव से अपने जीवन में सुख, समृद्धि और शांति की कामना करें।
सावन में इस तरह श्रद्धा से पूजा करने पर भगवान शिव अपने भक्तों को आशीर्वाद देकर जीवन को खुशहाल बना देते हैं।
उदया तिथि की वजह से 11 से शुरू होगा श्रावण
ज्योतिषाचार्य पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष सावन का महीना 11 जुलाई 2025 से शुरू होगा। इससे पहले 10 जुलाई को आषाढ़ पूर्णिमा है, जो 10 जुलाई की रात 1:36 बजे से शुरू होकर 11 जुलाई की रात 2:06 बजे तक रहेगी। सनातन परंपरा में उदया तिथि को मान्यता दी जाती है, इसी कारण श्रावण मास की प्रतिपदा तिथि 11 जुलाई की रात 11:07 मिनट से आरम्भ होकर 12 जुलाई की रात 2:08 मिनट तक रहेगी। और इसीलिए 11 जुलाई से सावन माह की शुरुआत मानी जाएगी।
सोमवार व्रत की तिथियां
14 जुलाई : पहला सोमवार व्रत
21 जुलाई : दूसरा सोमवार व्रत
28 जुलाई : तीसरा सोमवार व्रत
04 अगस्त : अंतिम सोमवार व्रत