यहां भाई उदय सिंह किले के सामने आयोजित दो मस्तानी शाम श्री रसिक बिहारी जी के नाम के दूसरे दिन शहर भर से भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़ें। जहां भजन गायकों ने अपनी सुरीली आवाज से श्याम भक्ति में समां बांध दिया। लोग देर रात तक भजनों पर झूमते रहे। हालांकि अधिकतर लोग यहां विनोद अग्रवाल को सुनने पहुंचे थे। लेकिन उनके न पहुंचने के बावजूद भी कार्यक्रम में भारी भीड़ उमड़ी रही। श्री बृज रसिक पागल सखा मंडल द्वारा आयोजित इस भजन संध्या का शुभ आरंभ सतीश बंसल व पंकज बंसल (एकांश मोटर्स )ने दीप प्रज्वलित कर किया। दिल्ली से आये लायन प्रमोद सपरा व लायन रमेश अग्रवाल ने बतौर मुख्यातिथि भाग लिया। भजन गायक बलदेव सहगल व धीरज बावरा ने बताया कि विनोद अग्रवाल की धर्म पत्नी का स्वास्थ्य अचानक खराब हो जाने के कारण विनोद अग्रवाल रास्ते में से ही घर चले गए।
बलदेव सहगल ने कार्यक्रम कि शुरुआत हरे कृष्ण हरे कृष्ण हरे राम हरे राम महामंत्र कि जाप से की व धीरज बावरा ने अपने भजन, क्यों धीरज खोई जाती है वो आएंगे, आजा आजा मेरे सांवरिया बड़ी देर भाई अब आजा, जैसे भजन सुनाये तो पंडाल में उपस्थित भगत जन झूमने नाचने लगे, दोनों भजन गायकों ने ऐसा समां बंधा कि सभी भक्त जन भाव विभोर होकर झूमने लगे तथा फूलों की होली खेलने लगे। जब धीरज बावरा ने होली के भजन गाए कि मैं तो तुम संग होली खेलूंगी मैं तो थम संग, हो हो हो होली के रसिया पर तो श्रद्धालु नाच उठे। इस अवसर पर कैथल शहर के गणमान्य व्यक्तियों सुभाष मित्तल, जगदीश बहादुर खुरानिया, सुशील बंसल, कैलाश भगत ,नरेंद्र मिगलानी, कृषण मिगलानी व अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने अपनी उपस्थिति दी। संस्था द्वारा निकले गए ईनामी कूपन में धर्मपाल ने सर्वश्रेष्ठ इनाम जीता। इस अवसर पर संस्था के सदस्य श्याम मदान, भारती कालरा, राकेश अग्रवाल, नवीन गोयल, कारन सैनी, धन सचदेवा, संदीप(स्वीटी), चीकू, सोनू, इश्वर गुप्ता योगराज बत्रा, विजय मदान व जयदेव धीमान इत्यादि उपिस्थ थे।