संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। अमेरिका से डिपोर्ट हुए अवैध प्रवासियों का मामले में जिले में अब तक कुल 25 युवा स्वदेश वापस लौट चुके हैं। इन सभी युवाओं की कहानी एक जैसी है। इसमें कोई जमीन तो कोई रिश्तेदारों से कर्ज लेकर अमेरिका पहुंचा था, लेकिन अमेरिका की ट्रंप सरकार के एक फैसले से इनके सपने चकनाचूर हो गए हैं। रविवार देर रात को तीसरे विमान में भी कैथल जिले के सात युवक शामिल हैं।
एक युवक बदसुई, एक खेली गुलाम अली, एक पबनावा तो एक कुराड़ व एक गुलियाणा और दो कैथल के निवासी हैं। हालांकि अभी सभी युवाओं में से एक भी युवा अभी अपने घर वापस नहीं लौटा। इन युवाओं में एक युवक का पता तो कैथल जिले का है, लेकिन वह इस समय करनाल में रहता है। वहीं, रविवार देर रात डिपोर्ट हुए सभी युवा अंबाला ही रुके हुए हैं। वे अभी तक कैथल में अपने घर वापस नहीं पहुंचे हैं। इन सभी युवाओं के परिजनों ने किसी भी प्रकार से कोई भी जानकारी सांझा नहीं की है। हालांकि उनका कहना था कि प्रशासनिक कार्रवाई से वह पूरी तरह से संतुष्ट हैं।
लौटे युवाओं का ब्योरा
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जसप्रीत- बदसुई
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सुशील कुमार- पबनावा
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रोहित- खेड़ी गुलाम अली- यह करनाल में रहता है।
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दीपक- गुलियाणा
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साहिल- भगत सिंह कॉलोनी, कैथल।
n प्रभजोत सिंह- राधा स्वामी कॉलोनी, कैथल।
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राकेश- कुराड़।
डंकी ः यह शब्द पंजाब के डुंकी शब्द से आया है, जिसका मतलब होता है एक जगह से दूसरी जगह कूदना। डंकी रूट से एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने में कई बार महीनों लग जाते हैं। इसमें लोग अवैध तरीके से ट्रक, विमान या नाव, पैदल चलकर या जंगलों के रास्ते जाते हैं।
लाखों खर्च करके गया था अमेरिका राकेश
कलायत। अमेरिका से डिपोर्ट होकर वापस कुराड़ गांव में आने वाले राकेश कुमार करीब 50 लाख रुपये खर्च करके टूरिस्ट वीजा पर अमेरिका पहुंचे थे। दो दिन में ही उनको वापस स्वदेश के लिए रवाना कर दिया गया। उनको अमेरिका के गुआना से वापस भेजा
गया है। राकेश कुमार विवाहित हैं और उनके पास एक बेटा व एक बेटी है। उनके भाई दिल्ली पुलिस में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनके परिजन
किसी से भी बात करने में परहेज ही कर रहे हैं। संवाद