संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले की सभी ग्राम पंचायतों में ठोस कचरा प्रबंधन एक्ट-2026 लागू कर दिया गया है। इसके तहत घरों और सार्वजनिक स्थानों से निकलने वाले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से पृथक्करण कर उसका उचित प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा। अभियान की शुरुआत बुधवार को ग्राम पंचायत माघो माजरी से की गई।
जिला संयोजक प्रदीप कुमार और खंड संयोजक नरेंद्र सिंह ने ग्रामीणों को ठोस कचरा प्रबंधन एक्ट-2026 के प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हरे रंग के डस्टबिन में गीला कचरा जैसे फलों के छिलके, पेड़ों की पत्तियां, नीले रंग के डस्टबिन में सूखा कचरा जैसे प्लास्टिक की बोतलें, कांच और गत्ते का कचरा, लाल रंग के डस्टबिन में सैनिटरी कचरा जैसे बच्चों के डायपर, सैनिटरी पैड और नैपकिन और काले रंग के डस्टबिन में विशेष देखभाल वाले कचरे जैसे बैटरी सेल, बल्ब, दवाइयां और ब्लेड डालने चाहिए।
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जिला परिषद के सीईओ सुरेश राविश ने बताया कि जिन ग्राम पंचायतों एवं महाग्रामों की जनसंख्या 7,500 या उससे अधिक है, वहां स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए किराये पर ट्रैक्टर-ट्रॉली, एक चालक तथा एक कचरा संग्रहकर्ता रखने की अनुमति प्रदान की गई है। इससे घर-घर से कचरा संग्रहण और उसके नियमित निस्तारण की व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे ठोस कचरा प्रबंधन के नियमों का पालन करें। कचरे को निर्धारित श्रेणियों के अनुसार अलग-अलग डस्टबिन में डालें और स्वच्छ एवं स्वस्थ गांव के निर्माण में अपना सक्रिय योगदान दें।