संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी ‘लाडो लक्ष्मी योजना’ का लाभ लेने के लिए पात्र महिलाओं को 2100 रुपये ‘लक्ष्मी’ स्वरूप मिल रहे हैं, लेकिन जिले में अब तक मात्र 40 हजार महिलाओं ने ही आवेदन किया है जबकि जिले में लगभग 84 हजार महिलाएं इस योजना की पात्रता सूची में शामिल हैं।
जागरूकता की कमी और आवश्यक दस्तावेजों को लेकर परिवारों में संकोच के कारण अनेक महिलाएं अपना आवेदन आगे नहीं बढ़ा पा रही हैं।
योजना ने कई परिवारों के रिश्तों में भी अप्रत्याशित बदलाव लाए हैं। जिन महिलाओं को अपने सास-ससुर के दस्तावेजों और अनुमति की जरूरत है, वे अब परिवार के बड़ों से संबंध सुधारने में जुट गई हैं। कई जगहों पर वर्षों से नाराज चल रही बहुएं योजना के 2100 रुपये ‘लक्ष्मी’ स्वरूप पाने के लिए घर के बड़ों को मनाने के प्रयास कर रही हैं। योजना के तहत दो माह की दोनों किस्तें एक साथ जारी हो सकती हैं, जिससे महिलाओं को एकमुश्त राशि मिल सकेगी।
एक महिला ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उसकी बहू पिछले दो-तीन सालों से अलग रह रही थी, लेकिन योजना का लाभ लेने के लिए हाल ही में दोबारा संपर्क में आई है।
महिला ने मुस्कराते हुए कहा, “पहले तो सुख-दुख में भी नहीं पूछती थी, अब कहती है — मां जी, आपके दस्तखत और दस्तावेज चाहिए।”
हाल ही में उपायुक्त प्रीति ने लघु सचिवालय में अधिकारियों के साथ बैठक कर निर्देश दिए कि कोई भी पात्र महिला योजना के लाभ से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि जिन महिलाओं ने अभी तक आवेदन नहीं किया है, उनसे घर-घर जाकर संपर्क किया जाए और मोबाइल एप के माध्यम से पंजीकरण कराया जाए। सत्यापन कार्य को तेज़ गति से पूरा करने और गांव-गांव में विशेष शिविर लगाने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
शंका के चलते महिलाएं नहीं दिखा रहीं उत्साह
अधिकारियों को आवेदन संख्या बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। योजना के लिए पंजीकरण कर चुकी महिलाओं के खातों में राशि आनी शुरू हो चुकी है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में पात्र महिलाएं रजिस्ट्रेशन से दूरी बना रही हैं। गांवों में यह धारणा प्रचलित है कि योजना का लाभ लेने से राशन कार्ड कट सकता है या सरकारी मशीनरी उनकी आर्थिक स्थिति पर संदेह कर सकती है। सौंगल निवासी सुमित्रा देवी ने कहा, “हमारे पास पहले ही बहुत सी मुश्किलें हैं। राशन कार्ड के तहत घर का खाना ठीक से चलता है। अब लाडो लक्ष्मी योजना में रजिस्ट्रेशन करने से डर लगता है। अगर राशन कार्ड कट गया तो बच्चों के लिए खाना कहाँ से लाऊँगी?”