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बच्चों के स्मार्ट क्लासेज में चमक रहे हैं चेहरे

Mon, 27 Jun 2016 12:18 AM IST
ब्यूरो कैथल
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स्मार्ट क्लासेज में दी बच्चों को जानकारी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सेवा का सच्चा जज्बा हो तो राहें अपने आप बनती जाती हैं। नर नारायण सेवा समिति ने सड़कों पर कूड़ा बीनने वाले, भीख मांगने वाले, झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले 300 बच्चों को पढ़ाने का बीड़ा उठाया तो मदद को कई हाथ आगे आ गए। समिति द्वारा भी समाज के सहयोग से बच्चों की शिक्षा में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी जा रही। गर्मियों की छुट्टियों में इन बच्चों के लिए एक माह तक स्मार्ट क्लासेज लगाई गई, जिसका रविवार को समापन हो गया। समापन अवसर पर दो नए सदस्य राजीव व रजनीश समिति से जुड़े और बच्चों को आशीर्वाद दिया।
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हुडा सेक्टर 20 में एक खाली पड़े अपार्टमेंट में ये स्मार्ट कक्षाएं लगाई गई। जिसमें बच्चों को प्रोजेक्टर के माध्यम से अंग्रेजी की प्राथमिक जानकारी सहित शब्दों के चयन एवं उच्चारण की जानकारी दी गई। एक माह में करीब 200 से ज्यादा अंग्रेजी के शब्द सीख चुके बच्चों के चेहरों पर अलग सी चमक नजर आई। बच्चे नरेश, सोनिया, मोनू सहित अन्य ने कहा कि उन्हें यहां आकर काफी अच्छा लगा।
समिति द्वारा शहर में सेक्टर 21 में केशव माधव बस्ती, रेलवे स्टेशन के निकट संत कबीर बस्ती, जींद रोड पर कन्या स्कूल के पास स्वामी विवेकानंद बस्ती व ट्रक यूनियन के पास डेहा बस्ती में ये कक्षाएं लगाई जा रही हैं। जहां इस समय बच्चों की संख्या बढ़कर 300 से ज्यादा हो गई है। समिति सदस्य इनमें से 80 से ज्यादा बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। शेष बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाया जा रहा है। 8 अध्यापक हर रोज शाम को बच्चों की कक्षाएं लेते हैं। जिसमें से 3 अध्यापक पिछले दो साल से लगातार सेवाएं दे रहे हैं।
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अब अभिभावकों में लगी पढ़ाने की होड़
18 दोस्तों द्वारा शुरू किया गया यह कार्य अब लगातार बढ़ता जा रहा है। इन बस्तियों में दिहाड़ीदार मजदूर, भीख मांगने वाले व सड़कों आदि पर मजदूरी करने वाले लोगों में होड़ लगी है कि अब उनका बच्चा पढ़े तो सरकारी की बजाए समिति के सहयोग से निजी स्कूल में पढ़ सके। इसके लिए समिति सदस्यों के पास अभिभावक पहुंच रहे हैं।


मदद का तरीका भी अनूठा
समिति सदस्य पहले पूरा खर्च खुद उठाते थे। फिर लोग जुड़ने लगे। अब नया तरीका ये निकाला है कि बच्चों को पढ़ाई में जिन नोट बुक की जरूरत पड़ती है, उसके लिए 1 लाख रुपये की 7000 नोट बुक छपवा ली है। जिन पर फर्मों की प्रचार सामग्री भी प्रकाशित है। जिस फर्म की यह प्रचार सामग्री है, उससे एक तिहाई कीमत ली जाती है। बच्चों को इतनी ही कम कीमत पर यह नोट बुक दी जाती है। एक रजिस्टर यदि बाजार में 60 रुपये में मिल रहा है तो यहां उसे 20 रुपये में दिया जा रहा है।

बच्चों को पेस्ट, शैंपू भी दिया जाता है
बच्चे  झुग्गी-झोपड़ियों में रहते हैं। वहां वे साफ-सफाई से रहें, इसके लिए बच्चों को पेस्ट, मंजन, शैंपू सहित अन्य सामग्री भी दी जाती है।


यहां योगदान दें शहरवासी
समिति सदस्यों ने कहा कि अब तक उनके साथ काफी शहरवासी जुड़ चुके हैं। सदस्यों ने समाज के लोगों से आह्वान किया है कि वे अपने बच्चों के जन्मदिन पर यहां आकर इन बच्चों से जुड़ें। उनके लिए सहयोग दें तो इन बच्चों की और भी अच्छे तरीके से मदद हो सकती है। समिति सदस्यों राजेश गर्ग, राजेश गोयल, धुप मित्तल, सुशील गर्ग, सुशील बंसल, बृजभूषण बंसल, सुशील गोयल, सतीश कुमार, अजय बंसल, पंकज मंगला, रविंद्र गर्ग, रमेश कुमार, प्रवीण कुमार, मेमराज गर्ग, विजय गर्ग, गौरव मित्तल, नरेश बंसल, मुकेश गुप्ता सहित समिति के अन्य सदस्य यहां समय एवं सहायता दे रहे हैं।
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