कैथल। जिले के मटौर गांव निवासी 22 वर्षीय रवि की रूस में मौत के बाद परिवार शव को लाने के लिए सरकार से गुहार लगा रहा है। दूसरी ओर अभी भी गांव के पांच अन्य युवाओं का पता नहीं लग रहा है। पिछले साल ही इन छह युवाओं को एजेंट ने अच्छी नौकरी का प्रलोभन देकर रूस भेज दिया था। वहां पर सेना में सफाई का काम पर इन्हें मिला लेकिन बाद में परिजनों का कहना है कि इन्हें रूस-यूक्रेन युद्ध में झोंक दिया गया। रवि के परिजनों ने भारत सरकार और प्रशासन से उसका शव गांव लाने की गुहार लगाई है।
इससे पहले इन्हें 10 दिन का प्रशिक्षण भी दिया गया था। मार्च के महीने में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान इनमें से एक युवक साहिल के पैर में गोली लगने की सूचना परिजनों को हुई। वहां के एक अस्पताल में जब वह भर्ती था तो गोली लगने का खुलासा मेडिकल रिपोर्ट से हुआ था। इसके बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित भी हुआ। परिजनों का कहना था कि साहिल को सामान लोड करने का काम दिया गया था लेकिन कुछ दिन का प्रशिक्षण देने के बाद उसे जबरदस्ती यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में उतार दिया। परेशान परिजनों ने सरकार से युवाओं को जल्द से जल्द वापस स्वदेश लाने की गुहार लगाई। राजनीति आरोप-प्रत्यारोप के भी दौर चले लेकिन फिर शांत हो गया।
गौरतलब है कि इसी साल की फरवरी माह में एक्स (ट्विटर) पर कुछ दिन पहले रूस की सेना की वर्दी पहनकर करनाल के हर्ष ने अपनी वीडियो वायरल कर सरकार से सहायता की अपील की थी। हर्ष ने भी यह आरोप लगाया था कि उसे जबरदस्ती इस जंग में फंसाया है। रवि के अलावा अभी साहिल, बलदेव, राजेंद्र व अन्य दो युवक वहां फंसे हुए हैं। जबकि मार्च माह में रवि ने युद्ध के समय अपनी फोटो और वीडियो भेजी थी।
गौरतलब है कि रवि की मौत की पुष्टि मास्को (रूस) स्थित भारतीय दूतावास ने दो दिन पहले ही की थी। इसके बाद यह मुद्दा फिर से चर्चा में आ गया है। रवि के परिजनों ने सरकार से शव वापस गांव लाने की गुहार लगाई है। उनके घर पर दुख व्यक्त करने वालों की भीड़ लगी है। मृतक रवि के दादा बचना राम से दुख के कारण कुछ बोला नहीं जा सका और उन्होंने रोते हुए कहा कि रवि चला गया है। रवि की दादी अपने पोते रवि के पार्थिव शरीर के आने का इंतजार करते हुए घर के दरवाजे पर बैठी आंसू बहा रही थी।
रवि के परिजनों का कहना है कि वह रूस ट्रांसपोर्ट में काम करने गया था, लेकिन उसे जबरन युद्ध में भेज दिया। उसे रूसी सेना की वर्दी में देखा गया था। रवि के साथ गए अन्य कई युवक अभी भी वहां फंसे हुए है। उनकी भी अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। मृतक रवि के भाई अजय की दूतावास लंबे समय से बात चल रही थी। उसके भाई की दूतावास से चल रही पूछताछ के आधार पर यह खुलासा हुआ था। मृतक रवि के भाई अजय ने बताया कि दूतावास ने उन्हें कहा है कि वे मृतक की मौत की पुष्टि के लिए उसकी मां का डीएनए टेस्ट करना चाहते हैं, लेकिन उनकी मां की मौत हो चुकी है। इसलिए उन्होंने दूतावास से अनुरोध किया कि वे उसकी मां के जगह उसका डीएनए टेस्ट कर सकते हैं।
अजय के अनुसार सका भाई रवि रूस में 13 जनवरी को 2024 को ट्रांसपोर्ट में काम करने के लिए गया था। उसका परिवार कुछ समय से रवि के संपर्क में था, लेकिन इसके बाद उनके भाई को रूस की सीमा पर युद्ध के लिए भेज दिया गया है। कुछ दिन बाद यह रूसी आर्मी की वर्दी में देखा भी गया था। कहा कि 12 मार्च तक उसके भाई के साथ उसकी बात भी हुई है। इसके बाद पिछले छह महीने से न तो रवि से कोई बात हो पाई और न ही अन्य किसी युवक से कोई बात हुई। बताया कि भाई ने अंतिम बाद हुई बातचीत में बताया था कि सेना के लोगों ने उन्हें कहा कि या तो युद्ध को फ्रंट लाइन पर लड़ो नहीं तो उन्हें 10 साल की जेल होगी। उनकी केंद्र और प्रदेश सरकार से मांग है कि उनके भाई का शव भारत मंगवाया जाए। साथ ही वहां फंसे हुए अन्य भारतीय युवाओं को भी बचाया जाए।
गांव मटौर निवासी युवक सोनू ने बताया कि एक एजेंट ने गांव के एक साथ छह युवकों को रुपयों का लालच देकर युद्ध में धकेला था। मार्च से लेकर अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। अभी तक केवल रवि की मौत की सूचना ही परिजनों को मिली है। जबकि अन्य पांच युवकों के बार में किसी प्रकार की कोई जानकारी नहीं मिली है। इन युवाओं को गांव के एक एजेंट ने ही अधिक वेतन और अन्य लालच में एजेंटों ने धोखे से रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे जानलेवा युद्ध में धकेला था।
साहिल के परिजनों को भी उसका इंतजार
मटौर निवासी साहिल के पिता बाग सिंह ने बताया कि उन्होंने भी अपने बेटे साहिल को रोजगार की तलाश में खेती की जमीन का आधा एकड़ बेचकर बेटे साहिल को विदेश भेजा था, लेकिन एजेंट ने 10 लाख रुपये लेकर उनके बेटे साहिल को रूस-यूक्रेन युद्ध में धकेल दिया। दोनों देशों के बीच चल रहे इस जानलेवा युद्ध में उसके बेटे को गोली लगी थी। बेटे की मेडिकल रिपोर्ट भी उन्हें मिली है। बेटे साहिल को सामान लोड करने का काम दिया गया, लेकिन कुछ दिन का प्रशिक्षण देने के बाद उसे जबरदस्ती यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में उतार दिया। उसका अभी तक कोई पता नहीं लग पाया है।