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Kaithal News: सिसला धाम, पाई में लगाया भंडारा

Sun, 10 Mar 2024 02:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। वीर बर्बरीक श्याम ट्रस्ट की ओर से सिसला धाम में श्री श्याम फाल्गुन महोत्सव के उपलक्ष्य में सिसला धाम में विशाल भंडारे का आयोजन किया। धाम पर सुबह 10 बजे ही भंडारा शुरू हो गया था। भंडारे में कई हजारों की संख्या में दूर दराज से श्रद्धालु पहुंचे। गौरतलब है कि सिसला धाम पर बीते दिन दिनों से फाल्गुन महोत्सव मनाया जा रहा है। इस दौरान बीते तीन दिनों में लाखों श्रद्धालुओं ने बाबा श्याम की युवा अवस्था की प्रतिमा के दर्शन किए और भव्य निशान यात्रा निकाली। शनिवार शाम को धाम पर भजन संध्या का कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें प्रदेश के प्रसिद्ध गायक पहुंचे। यह कार्यक्रम देर तक जारी रहा।

सिसला धाम पर पहुंंची महिला श्रद्धालु नीलम, संजना, किरण, कमलेश, कृष्णा ने बताया कि उन्हें धाम पर आकर बहुत अच्छा लगा। पहले भी वह सिसला धाम पर कई बार आई हैं। बाबा श्याम सभी श्रद्धालुओं के दर्शन करने से ही मनोकामना पूर्ण करते हैं। उन्होंने कहा कि महाभारत का युद्ध होने से पूर्व बाबा श्याम ने यहां पर भगवान श्री कृष्ण को अपने शीश का दान किया था। जहां पर शीश का दान दिया था वह भूमि सिसला धाम है। जो कुरुक्षेत्र की 48 कोस की परिधि में आती है। बाबा श्याम के तीन बाण धारी हैं। उन्हें हारे का सहारा का भी कहा जाता है। बाबा श्याम ने अपनी माता का वचन दिया था कि जो भी युद्ध में हारेगा वह उसी का सहारा बनेगा। जब से ही बाबा का नाम हारे का सहारा पड़ा था। श्री कृष्ण ने बाबा श्याम का शीश दान में लेने के बाद उनको अपना श्याम नाम दिया था, और कलयुग में श्याम नाम से उनकी खाटू में पूजा होने आशीर्वाद दिया था। आज के समय में हर घर में बाबा श्याम की पूजा अर्चना होने लगी है।
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वीर बर्बरीक श्याम ट्रस्ट के प्रधान सुभाष सिसला ने बताया कि बीते तीन दिन से मंदिर में फाल्गुन महोत्सव का कार्यक्रम जारी है। शनिवार सुबह से ही विशाल भंडारा लगाया गया। शाम के समय भजन संध्या का कार्यक्रम हुआ। जिसमें प्रसिद्ध भजन गायकों ने हिस्सा लिया।

बाबा बिशनपुरी मंदिर में पहुंचे माथा टेकने

पाई। बाबा बिशनपुरी मंदिर में शनिवार को भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। यहां पर कई वर्षों से लेकर हर वर्ष भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। इसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु बाबा बिशनपुरी मंदिर में मथा टेकने के लिए पहुंचते हैं और आशीर्वाद लेते है।

मंदिर के महंत शिवपुरी ने बताया कि बाबा बिशनपुरी का बहुत ही पुराना इतिहास है, भंडारे की शुरुआत बाबा बिशन पुरी ने अपने गुरु बलवान पुरी की पुण्यतिथि पर की थी। किंवदंती है कि जब पहला भंडारा लगाया गया था तो विष्णु भगवान रूप बदल कर आए थे।

बाबा बिशनपुरी के सामने वह संत अपने असली रूप में आ गया भगवान विष्णु को अपने सामने देखा बाबा बिशनपुरी खुश हो गए और इस जमीन को पूजा स्थली के रूप में मनाने की मांग रखी।
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उससे कुछ वर्षों बाद बाबा बिशनपुरी ने भी इसी जमीन पर जिंदा समाधि ली। बाबा बिशनपुरी की मान्यता बहुत दूर दूर तक है, जहां रविवार के दिन बाबा बिशनपुरी मंदिर में धोक लगाई जाती है ओर हर साल भंडारा भी लगता है। संवाद
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