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शिक्षक के अभाव में कैसे सीखें संगीत

Tue, 06 Sep 2016 12:33 AM IST
ब्यूरो कैथल
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कार्यक्रम में प्रस्तुति देती छात्राएं - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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राजकीय स्कूलों में संगीत शिक्षक न होने के कारण छात्रों को संगीत कला का ज्ञान ही नहीं मिल रहा। गत दिनों सर्व शिक्षा अभियान के तहत आयोजित किए गए खंड स्तरीय कला उत्सव में यह बात देखने को मिली की छात्रों में संगीत के प्रति रुचि तो है मगर उन्हें तराशने के लिए न तो स्कूलों में संगीत शिक्षक है तथा न ही संगीत कला के प्रशिक्षण हेतु सामान उपलब्ध है।
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कला उत्सव के दौरान अधिकांश वे ही कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए जिन्हें बच्चों द्वारा पूर्व में विभिन्न अवसरों पर प्रस्तुत किया जा चुका है। सर्व शिक्षा अभियान द्वारा आयोजित कला उत्सव में पेंटिंग रंगोली, संगीत, नृत्य व ड्रामा जैसे विषयों को लेकर ही प्रतियोगिता आयोजित करवाई गई थी जिसमें खंड स्तर पर प्रथम स्थान हासिल करने वाले छात्र ही जिला स्तर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगे। इस प्रतियोगिता को 2 हिस्सों में विभाजित किया गया था जिसमें कक्षा छठी से 8वीं तक के छात्रों का एक ग्रुप बनाया गया था तो कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्रों को अलग ग्रुप में रखा गया था। जब स्कूलों में संगीत का प्रशिक्षण देने के लिए न तो संगीत शिक्षक हो तथा न ही यंत्र हो तो फिर भला ऐसे में किस प्रकार छात्र संगीत कला में पारंगत हो सकते हैं।

खंड में केवल मात्र 3 स्कूलों में है संगीत शिक्षक
कलायत खंड में माध्यमिक व हायर स्कूलों की संख्या 31 है जिसमें 14 जहां माध्यमिक स्कूल है वहीं आरोही मॉडल रामगढ़ पांडवा सहित 15 हायर स्कूल है। जिस प्रकार से दिशा निर्देश थे उसके अनुसार प्रत्येक स्कूल से जहां माध्यमिक विद्यालय से एक टीम शामिल हो सकती थी वहीं हायर स्कूलों से माध्यमिक स्तर के साथ व. माध्यमिक की टीम अलग होती जो कि कुल 48 टीमें बनती है। संगीत शिक्षकों का तैनात न होना ही यह कारण रहा कि इस प्रतियोगिता में दर्जन भर के करीब ही टीमें शामिल हुई।
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न तो कोई फंड न ही कहीं से खर्च मिलने का प्रावधान
राजकीय स्कूलों में जहां संगीत शिक्षक ही तैनात नहीं वहीं इसके लिए सरकार या शिक्षा विभाग द्वारा फंड भी नहीं दिया जा रहा। कई विद्यालयों में संगीत कला में दूसरे विषयों के शिक्षक ही छात्रों को संगीत में पारंगत करते हैं मगर धन की कमी यहां भी आड़े आ रही है।
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