संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय कैथल की ओर से बुधवार को डॉ. भीमराव आंबेडकर कॉलेज परिसर में ‘सप्त सिंधु वाल्मीकि समाज और महर्षि वाल्मीकि’ विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी आयोजित हुई। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं उत्तर क्षेत्र समरसता प्रमुख प्रमोद मुख्य अतिथि के रूप में तथा मुख्य वक्ता के रूप में हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के उपाध्यक्ष प्रो. कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि प्रमोद ने कहा कि श्रीराम सामाजिक समरसता की प्रतिमूर्ति हैं, उनके जीवन से हमें सीख लेनी चाहिए। उन्हीं के आदर्शों पर चलकर समाज से छोटे और बड़े का भाव समाप्त होगा। मुख्य वक्ता डॉ. कुलदीप अग्निहोत्री ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि दुनिया के पहले इतिहासकार हैं, जिन्होंने श्रीराम की कथा को पद्य के रूप में लिखा। वाल्मीकि की लिखी गई रामायण में मानवीय संवेदना, राजनीतिक चिन्तन, भारतीय संस्कृति और वैचारिक धारणाओं का खजाना है।
संगोष्ठी की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रमेश चंद्र भारद्वाज ने की। यह संगोष्ठी सप्त सिन्धु क्षेत्र के सांस्कृतिक, साहित्यिक और धार्मिक महत्व को उजागर करने के साथ-साथ महर्षि वाल्मीकि के जीवन और दर्शन को समझने के उद्देश्य से आयोजित की गई। कार्यक्रम में वाल्मीकि समाज के इतिहास, संस्कृति और समाज में इसके योगदान पर भी विस्तृत चर्चा की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमेश चंद्र भारद्वाज ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि का भारतीय संस्कृति के विकास में बहुत बड़ा योगदान है। महर्षि वाल्मीकि के जीवन दर्शन को समझने के लिए उनकी ओर से किए गए कार्यों पर अकादमिक शोध करके आज के संदर्भ में प्रस्तुत करने की आवश्यकता है। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. बृजपाल,
शैक्षणिक अधिष्ठाता प्रो सत्य प्रकाश दुबे, कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. मनोज कुमार भांबू, डॉ हरबंश सिंह झुम्मा, रजनीकांत शर्मा, देवेंद्र सिंह, सत्यपाल शास्त्री, श्याम बंसल आदि मौजूद रहे।